महाराष्ट्र के ग्राम पंचायत चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। अब तक शहरी इलाकों तक सीमित रही शिवसेना ने ग्रामीण इलाकों में भी पैठ बनानी शुरू कर दी है।
ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजे बताते हैं कि उन इलाकों में भी शिवसेना ने बेहतर प्रदर्शन किया है जहां कभी कांग्रेस और एनसीपी का बोलबाला था। इसलिए शिवसेना की चुनावी बढ़त को कांग्रेस और एनसीपी के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है।
साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने भाजपा का हाथ झटककर कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन किया। तीन दलों के साथ मिलकर राज्य में महाविकास आघाड़ी के माध्यम से शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने।
शिवसेना ने पहले भाजपा से गठबंधन कर प्रदेश में अपना जनाधार बढ़ाया और अब कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर ग्राम पंचायत चुनाव में उन्हीं का गढ़ भेदने की शुरुआत की है। वहीं, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र में भी शिवसेना ने अपनी ताकत दिखाई है।
सूबे में कुल 14,234 में से 12,711 ग्राम पंचायतों में चुनाव हुआ जबकि करीब 1600 ग्राम पंचायतों के सदस्य निर्विरोध चुने गए। इसमें से शिवसेना ने 3000 से अधिक ग्राम पंचायतों में जीत का दावा किया है।
वहीं, एनसीपी दूसरे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर है। शिवसेना की इस विजयी हुंकार ने न सिर्फ भाजपा की बल्कि कांग्रेस और एनसीपी की भी चिंता बढ़ा दी है।