शिवसेना ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेरकर महाराष्ट्र की सत्ता पाई है। विधानसभा चुनाव में 105 सीट पाने वाली भाजपा बस देखती रह गई। 10 साल से अधिक समय के जहां शिवसेना ने एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा जमाया, वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में भी अपना दबदबा बना लिया। इससे शिवसेना को मराठा राजनीति में वर्चस्व बनाने में मदद मिलेगी। उद्धव के सहारे सत्ता में भागीदार बनने का गिफ्ट एनसीपी और कांग्रेस को भी मिला है। इससे महाराष्ट्र में शरद पवार जहां राजनीति की धुरी बन गए हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी को राज्य में अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का अवसर मिल गया है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि भाजपा के खाते में केवल पछतावा आया है।
भाजपा बना सकती थी सरकार
भाजपा के नेता कहते हैं कि वह मुख्यमंत्री पद पर 50-50 का समझौता कर लेते तो उनकी सरकार बननी तय थी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी यही कहते हैं, लेकिन भाजपा ने यह समझौता नहीं किया। इसके उलट भाजपा ने एनसीपी के नेता अजित पवार पर दांव लगाया और महज 80 घंटे के भीतर भाजपा को उल्टे पांव लौटना पड़ा। देवेंद्र फडणवीस की सरकार के गिरने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी तरफ से सफाई जरूर दी, लेकिन इस दौरान उनकी झेंप साफ दिखाई दे रही थी। भाजपा के नेता भी मानते हैं कि इस पूरे प्रकरण ने जहां भाजपा के भीतर नया चिंतन पैदा कर दिया है, शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का सरदार बनने का अवसर भी दे दिया है।
क्यों शिवसेना ने लगाया मुख्यमंत्री पद पर दांव?
बाला साहब ठाकरे के समय से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री शिवसेना के नेता होते थे। नंबर दो की पार्टी भाजपा होती थी। उद्धव ठाकरे के कमान संभालने के बाद शिवसेना पावर गेम में नंबर दो की और भाजपा नंबर एक की पार्टी बन गई थी। मराठा राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति मराठों के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। वह हमेशा सत्ता में बने रहना चाहते हैं। बताते हैं इसका असर शिवसेना के महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभाव पर पड़ रहा था। इसलिए उद्धव ठाकरे ने पहले भाजपा के सामने 50-50 का प्रस्ताव रखा। भाजपा के इनकार के बाद उद्धव ने काफी कुछ सोच-समझकर कांग्रेस और एनसीपी जैसी विपरीत विचारधारा के साथ जाकर यह निर्णय लेने का जोखिम उठाया। ताकि शिवसेना महाराष्ट्र में अपनी पार्टी का आत्मसम्मान, स्वाभिमान बनाए रखे। इसी के साथ उन्होंने चचेरे भाई राज ठाकरे को भी साथ लाने की पहल की।