उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तौर पर शीला दीक्षित के नाम के ऐलान के साथ ही कांग्रेस की रणनीति प्रदेश के 14 फीसदी ब्राम्हण वोटों पर कब्जा करने की है।
2017 विधानसभा चुनावों में पार्टी की नैया पार लगाने का जिम्मा चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कंधों पर है और शीला दीक्षित के रुप में एक ब्राह्मण चेहरे को उतारने की योजना उनकी ही है।
अभी हाल ही में कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। ऐसे में जब कि विपक्षी दल भाजपा की नजर दलित वोटों पर टिकी हुई है जो कि बसपा का परंपरागत वोट बैंक है।
ऐसे में कांग्रेस की योजना ब्राह्मण और मुस्लिम वोट को हासिल करने की है। कांग्रेस ने इसी योजना के तहत गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया है।
पार्टी अपने तीन दशक पुराने इस परंपरागत ब्राह्मण और मुस्लिम वोट बैंक को फिर से हासिल करने की तैयारी में है।उत्तर प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस यहां पिछले तीन दशकों से सत्ता से बाहर है।
1989 में एनडी तिवारी कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री रहे। ऐसे में पार्टी शीला के रुप में एक स्वच्छ, बेदाग और अनुभवी कांग्रेसी नेता को प्रदेश में उतार रही है और कांग्रेस को उम्मीद है कि ऐसा करके वो सत्ता तक पहुंचने की अपनी मुहिम को धार दे सकती है।