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दूध के संकट को न्योता दे सकता है भैंस के मीट का निर्यात

Thu, 14 Jul 2016 04:42 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पिछले कुछ समय में देश में भैंस के मीट का निर्यात काफी बढ़ गया है। इसका मुख्य कारण देश में गोमांस पर बैन लगना है। इसके चलते आने वाले समय में न सिर्फ भैंस (मादा) की संख्या में गिरावट आ सकती है, बल्कि दूध के उत्पादन में भी कमी आ सकती है।
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यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है अगर इसी तरह से भैंस के मीट का निर्यात होता रहा तो देश में भैंस की संख्या में गिरावट आ सकती है, जो दूध का मुख्य स्रोत हैं।

रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट 2023 से शुरू हो सकती है, जिससे देश में दूध के उत्पादन में भी भारी गिरावट आ सकती है। आपको बता दें कि देश के कुल दूध उत्पादन का आधे से अधिक हिस्सा भैंस का दूध ही होता है।
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गोहत्या पर बैन लगने के बाद से भैंस के मीट की घरेलू मांग में बढ़ोत्तरी हो गई है। इस बढ़ोत्तरी का असर देश के निर्यात पर भी पड़ेगा। यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के आंकड़े दिखाते हैं कि 2009 में भारत का मीट निर्यात 609 हजार टन था, जो 2014 में करीब तीन गुना बढ़कर 2082 हजार टन हो गया।

हालांकि, 2015 में बीफ बैन के असर के चलते भैंस के मीट के निर्यात में मामूली गिरावट देखी गई। 2015 में मीट के निर्यात का आंकड़ा घटकर 1806 हजार टन हो गया।

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दुधारू गाय हो गईं सस्ती

महाराष्ट्र के लाइवस्टॉक मार्केट में पहले जो भैंस का मीट 10,000-11,000 रुपए प्रति क्विन्टल था, वो अब बढ़कर 13,000-14,000 रुपए प्रति क्विन्टल हो गया है।

यह बढ़ोत्तरी गोहत्या पर बैन के चलते हुई है, जिसे बाद में बढ़ाकर बैल को भी न मारने तक तक दिया गया। यह नियम मार्च 2015 में लागू हुआ था, जिसका असर मीट के बाजार पर साफ देखने को मिला।

यही नहीं, इस बैन के बाद से डेयरी गायों की कीमतों में गिरावट आ गई है। जो गाय पहले 65,000 रुपए तक की बिका करती थीं, उनकी कीमत अब घटकर लगभग 50,000 रुपए हो गई है।

वहीं दूसरी ओर, जिन बूढ़ी गायों और बैलों की कीमत 18,000-19,000 रुपए थी, अब वह 15,000-16,000 रुपए हो गई है। वाणिज्य मंत्रालय से मिले आंकड़ों के हिसाब से भी भैंस के मीट के निर्यात में गिरावट देखने को मिली है।

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