दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने जब से पार्टी का कामकाज संभाला है, वे रोज पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रही हैं। लेकिन बुधवार की बैठक अपने आप में कुछ अलग थी। वजह यह थी कि इस बैठक में वे सभी 'मंत्री' मौजूद थे जो कभी उनके साथ दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल में महत्त्वपूर्ण मंत्रालय संभाला करते थे।
यानी छद्म रुप से शीला दीक्षित की 'कैबिनेट' ने एक बार फिर बैठक की और दिल्ली की विकास की योजनाओं पर चर्चा की। बैठक में एके वालिया, राजकुमार चौहान, रमाकांत गोस्वामी, हारुन यूसुफ, परवेज हाशमी, मंगतराम सिंघल और योगानंद शास्त्री शामिल हुए। बैठक में दिल्ली को विकास की राह पर दोबारा ले जाने की रणनीति पर विचार हुआ।
पार्टी के एक नेता के मुताबिक इस बैठक में बड़े सिलसिलेवार ढंग से जिन नेताओं के पास जो विभाग थे, उनके बारे में मौजूदा सरकार की खामियों पर विचार किया गया। नेताओं ने अरविंद केजरीवाल सरकार के द्वारा विभिन्न विभागों में अब तक के किए गए कामकाज को आधार बनाकर जनता में उनकी खामियों को बताने की रणनीति पर विचार हुआ। इसके अलावा पार्टी नेताओं के क्षेत्र में किन मुद्दों को उठाने पर लाभ मिल सकता है, इस पर भी विचार हुआ।
बुधवार को ही पार्टी के जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों और पार्टी पर्यवेक्षकों की बैठक भी हुई। इस बैठक में शीला दीक्षित ने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को ज्यादा भरोसे में लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि जीत दिलाने के लिए सबसे अहम भूमिका बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की होती है।
इसलिए उन्हें उनके बूथ पर भरोसे में लिया जाए और पार्टी की नीतियों को उन्हें सबसे बेहतर ढंग से बताया जाए। शीला दीक्षित ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता से उनके घर के आस-पास के लोगों से भाजपा-आप के बीच झगड़े के कारण हुए नुकसान की चर्चा करने की बात कही गई। पार्टी फरवरी से अपने प्रचार अभियान को अपने चरम पर ले जाने की रणनीति बना चुकी है।