शेख हसीना ने भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के शामिल नहीं होने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भाग लेने से बांग्लादेश को आर्थिक और सामाजिक विकास के नए अवसर मिल सकते थे। हसीना ने विदेश नीति के फैसले व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के बजाय देश के हितों को ध्यान में रखकर लेने की बात कही। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के शामिल नहीं होने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस सम्मेलन में शामिल होता तो देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नए मौके मिल सकते थे।
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ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने से क्या फायदा होता?
शेख हसीना ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने से बांग्लादेश को विकास के नए अवसर मिल सकते थे। इससे देश की आर्थिक और सामाजिक तरक्की के लिए नए रास्ते खुल सकते थे। हसीना ने कहा कि किसी देश की विदेश नीति व्यक्तिगत नाराजगी या थोड़े समय के राजनीतिक फायदे को देखकर नहीं चलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय देश के हितों को ध्यान में रखना चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश को ऐसी विदेश नीति अपनानी चाहिए, जो समझदारी भरी, संतुलित और आत्मविश्वास से भरी हो। उन्होंने यह बात भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के शामिल नहीं होने के फैसले पर कही।
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बाग्लादेश वापसी पर क्या बोलीं हसीना?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि उनकी बांग्लादेश वापसी लोकतंत्र, मतदान के अधिकार और कानून के शासन को बहाल करने के संघर्ष का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा होना, उनके अधिकारों के लिए लड़ना और देश में लोकतंत्र, सुरक्षा तथा विकास बहाल करने में मदद करना चाहती हैं।