शायरा बानो ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का स्वागत और समर्थन करती हूं। बानो ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में औरतों की स्थिति को समझा जाए, इस फैसले को एक्सपेट किया जाए और जल्दी से जल्दी कानून बने।
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ये महिला हैं शायरा बानो जिन्होंने साल 2016 की फरवरी में अपनी याचिका दायर की। वे कहती हैं कि जब वह अपना इलाज कराने के लिए उत्तराखंड में अपनी मां के घर गईं तो उन्हें तलाकनामा मिला।
शायरा बानो ने इलाहाबाद में रहने वाले अपने पति और दो बच्चों से मिलने की कई बार गुहार लगाई लेकिन उन्हें हर बार दरकिनार कर दिया गया। और, उन्हें अपने बच्चों से भी मिलने नहीं दिया गया।
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उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह के प्रचलन को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी। शायरा बानो की कहानी त्रासदियों से भरी है। शायरा को उसके पति रिजवान ने तीन तलाक देकर घर से बेदखल कर दिया था।
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शायरा ने बताया कि उसका छह बार गर्भपात कराया गया। उसके दो बच्चे हैं जिन्हें पति ने अपने पास रख लिया। शायरा का कहना है कि वह अपने बच्चों को साथ रखना चाहती है। शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन कानून,1936 की धारा-दो की संवैधानिकता को चुनौती दी थी।