अमर उजाला डॉट कॉम के लाइव कार्यक्रम में बातचीत करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सुशांत भी एक बेहतरीन कलाकार था और उसने बॉलीवुड में जो मुकाम हासिल किया अपनी योग्यता और मेहनत से हासिल किया। सिन्हा ने उन लोगों पर भी सवाल खड़ा किया, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर सुशांत की मौत को लेकर तरह तरह के बयान जारी कर रहे हैं।
सिन्हा ने कहा कि अगर एक क्षण के लिए सुशांत की दुखद मौत को लेकर उनकी बात मान भी लें तो ये लोग जो अब इतनी हायतौबा कर रहे हैं, तब कहां थे जब सुशांत सिंह जीवित थे। वो अकेलेपन और अवसाद से जूझ रहे थे, तब इनमें से कितने थे जो सुशांत से बातचीत करते थे और उसके साथ खड़े हुए थे। यह पूछे जाने पर कि क्या बॉलीवुड में योग्यता और मेहनत के रास्ते परिवारवाद आड़े आता है, सिन्हा ने कहा कि खुद वो जब फिल्मों में आए थे तो दूर दूर तक उनका फिल्मी दुनिया से कोई नाता नहीं था। लेकिन उन्हें मौका दिया गया और जनता ने उनके अभिनय को पसंद किया।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, राजकुमार, मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, मनोज वाजपेयी, इरफान जैसे अनेक अभिनेता जब फिल्मी दुनिया में आए तो उनका यहां कोई सरपरस्त नहीं था, लेकिन उन्हें जाने माने निर्माता निर्देशकों ने मौका दिया और वो सफल हुए। गुटबाजी को लेकर शत्रुघ्न ने कहा कि गुट यहां पहले से हैं और यहीं नहीं हर क्षेत्र में लाइक माइंडेड लोगों का एक गुट बन जाता है। मगर गुटबाजी को हौआ नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपनी बेटी सोनाक्षी को लेकर लगने वाले परिवारवाद के आरोप पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी के लिए उन्होंने कभी किसी से एक शब्द की पैरवी नहीं की। सलमान खान ने खुद उसे दबंग में रोल दिया। उन्होंने कहा कि अगर परिवारवाद ही करना होता तो उनके दोनों बेटे लव और कुश फिल्मों में क्यों नहीं आए। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बिहार से वह खुद, प्रकाश झा, मनोज वाजपेयी, शेखर सुमन और सुशांत सिंह राजपूत जैसे लोगों ने बॉलीवुड में अपना मुकाम खुद बनाया। अगर सिर्फ परिवारवाद और गुटबाजी ही हावी होती तो यह सब कैसे आगे बढ़ते।
उन्होंने कहा कि कई नामी गिरामी फिल्मी परिवारों के बच्चे फिल्मों में आते हैं और गायब हो जाते हैं, क्योंकि जनता उन्हें पसंद नहीं करती। वहीं कुछ को जनता काफी पसंद करती है और वह अपना मुकाम बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नए कलाकार को हमेशा खुद को सबसे बेहतर साबित करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर खुद को सबसे बेहतर साबित नहीं कर सकते तो खुद को बाकी सबसे अलग साबित करने की कोशिश करनी चाहिए। सफलता पाने के लिए इसी जिद के साथ कठिन मेहनत बेहद जरूरी होती है।
राजनीतिक सवालों के जवाब देते हुए बॉलीवुड स्टार और पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने सवाल किया है कि आखिर ऐसी क्या बात हो गई है कि एक-एक करके सभी पड़ोसी देशों से हमारे रिश्ते खराब होते जा रहे हैं। पाकिस्तान और चीन से हमारे रिश्ते कुछ तनावपूर्ण हमेशा ही रहे हैं, लेकिन अब कुछ अन्य देशों से भी हमारे रिश्तों में दरार आ रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस मुद्दे पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और विदेश नीति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सीनियर फिल्म एक्टर ने यह बात ऐसे समय में कही है जब भारत और चीन के बीच संबंध ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए वरिष्ठ फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि किसी मुद्दे पर विरोध अलग बात है, लेकिन किसी को प्रधानमंत्री की नीयत पर शक नहीं होना चाहिए। यह ऐसा समय है जब पूरे देश को हमारी सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देना चाहिए। अगर किसी मुद्दे पर किसी के भिन्न विचार हैं तो उस पर सही समय पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन इस समय पूरी दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक हैं।
इसके लिए सभी को एक साथ आना चाहिए। हालांकि, इसी दौरान मीडिया के एक वर्ग में उपयोग की जा रही भाषा पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बेहद सधी और शांतपूर्ण बातचीत होनी चाहिए, लेकिन कुछ लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जिनसे संबंध बनने की बजाय बिगड़ने की आशंका ज्यादा होती है। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया को शांति की सबसे ज्यादा आवश्यकता है और केवल उसी को आगे बढ़ाने की बात की जानी चाहिए।
भाजपा आज भी पहला घर
राजनीति के भी अच्छे खिलाड़ी रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान भाजपा के साथ अपने संबंधों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि किसी मामले में भाजपा आज भी उनका पहला घर है। यहीं से उन्होंने राजनीति की पारी की शुरुआत की। नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से उन्होंने यही सीखा था कि स्वयं से बड़ी पार्टी होती है और पार्टी से बड़ा देश होता है।
बुजुर्ग नेताओं से मिली इसी सीख के कारण उन्होंने नोटबंदी जैसे कुछ फैसलों पर सरकार का विरोध किया। देश के युवाओं, किसानों और गरीबों के हक में उठाई गई उनकी यही बात कुछ लोगों को अच्छी नहीं लगी, जिसके बाद कुछ इस तरह की परिस्थितियां बनीं कि उन्हें भाजपा से अलग राह चुननी पड़ी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है।