कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने लिखा कि जब नेतृत्व योग्यता या समर्पण के बजाय वंश से तय होता है, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। थरूर ने नेहरू-गांधी परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि अब भारत को वंशवाद छोड़कर योग्यतावाद अपनाना चाहिए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि राजनीतिक परिदृश्य में वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। नेहरू-गांधी परिवार ने यह सिद्ध किया कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। थरूर ने कहा कि अब वक्त आ गया कि भारत वंशवाद की जगह योग्यतावाद अपनाए। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान के लिए लिखे लेख में कहा, नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस से जुड़ा हुआ है, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में वंशवाद हावी है। जब राजनीतिक सत्ता का निर्धारण योग्यता, प्रतिबद्धता या जमीनी स्तर पर जुड़ाव के बजाय वंशवाद से होता है, तो शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
थरूर ने अपने अनुभव के आधार पर लिखा : प्रधान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने थरूर के लेख के बाद कांग्रेस और राजद पर तंज कसते हुए कहा, थरूर ने यह लेख अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। मैं शशि थरूर के बयान का स्वागत करता हूं। उनकी टिप्पणी से कांग्रेस और राजद को निश्चित रूप से ठेस पहुंचेगी क्योंकि उनकी राजनीति एक परिवार तक सीमित है। वे अपने परिवार से बाहर सोच ही नहीं सकते।
राशिद अल्वी बोले- पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकते
थरूर के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि लोकतंत्र में, अंततः जनता ही तय करती है कि किसे सत्ता में लाया जाए। किसी को भी सिर्फ उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। आप यह प्रतिबंध नहीं लगा सकते कि आप चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि आपके पिता सांसद थे। ऐसा हर क्षेत्र में हो रहा है। आप इसका क्या रास्ता निकालेंगे?