कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव सोमवार को संपन्न हो गया। बुधवार को इसके नतीजे भी आ जाएंगे। उन नतीजों में चुनाव कोई भी जीते, लेकिन कांग्रेस में एक बड़े बदलाव की आहट ही नहीं, बल्कि उसे आगे पहुंचाने की मुहिम की शुरुआत तो हो ही जाएगी। जिसे लेकर विपक्ष ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता अकसर आवाज उठाते रहते थे। यह बदलाव की आहट होगी कांग्रेस में डिसेंट्रलाइजेशन की पॉलिटिक्स की। शशि थरूर जिन दस पॉइंट्स के सहारे चुनावी मैदान में उतरे हैं, उसमें सबसे बड़ा मुद्दा पार्टी में विकेंद्रीकरण का है। राजनीतिक गलियारों में यह कहा जा रहा है कि शशि थरूर को मिलने वाला हर मत पार्टी में डिसेंट्रलाइजेशन के एजेंडे को आगे बढ़ाने और एक बदलाव वाला होगा।
कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव से पहले शशि थरूर ने अपने 10 पॉइंट्स की वह अपील एक बार फिर से दोहराई, जिसे वह लगातार अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहते आए हैं। शशि थरूर ने पार्टी में डिसेंट्रलाइजेशन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह वही मुद्दा है जिसे लेकर पार्टी में नाराज नेताओं का एक बड़ा धड़ा ग्रुप-23 बनकर तैयार हुआ था। सियासी जानकार बलदेव नारायण सिंह कहते हैं कि चुनावी मैदान में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खरगे ने जमकर चुनाव प्रचार भी किया है, उन्हें और जहां तक संभव हुआ है वहां तक यह पहुंचे भी हैं। सिंह कहते हैं कि शशि थरूर ने पार्टी के अंदर डिसेंट्रलाइजेशन के मुद्दे को उठाकर विपक्ष के उस मुद्दे को हवा दी है, जो पार्टी के भीतर रहकर पार्टी के ही कई वरिष्ठ नेता आवाज उठाते रहते थे। उनका कहना है कि शशि थरूर की अपील लगातार यही थी कि वह पार्टी को आधुनिक, डिसेंट्रलाइज्ड और बेहतर समावेशी तरीकों से आगे बढ़ाना चाहते हैं। सियासी गलियारों में चर्चा इसी बात की हो रही है कि शशि थरूर कांग्रेस में बदलाव के लिए चुनाव लड़ रहे थे और उन्हें मिलने वाला हर मत चाहता है कि पार्टी में बदलाव हो।
राजनीतिक विश्लेषक एसएन शंखधर कहते हैं कि परिणाम कुछ भी हो लेकिन पार्टी के अंदर लंबे समय से उठ रही डिसेंट्रलाइजेशन की मांग को कम से कम एक बड़े चुनाव के माध्यम से खुलकर सामने लाने का साहस तो किया ही गया है। उनका कहना है कि लगातार जो आरोप कांग्रेस पर गांधी परिवार पर लगते रहे हैं, कम से कम इस चुनाव के माध्यम से शशि थरूर को मिलने वाले वोट यह गवाही देंगे कि पार्टी के भीतर एक बड़े बदलाव की मांग उठ रही है। कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे नेता शशि थरूर भी इस बात का जिक्र करते हैं कि उन्हें मिलने वाला हर एक वोट एक बदलाव के लिए दिया जाने वाला वोट होगा।