नेपाल में आई विनाशकारी बाढ पर अपनी एक पोस्ट में ‘ड्रामा’ शब्द इस्तेमाल करने को लेकर आलोचनाओं में घिरे कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय किसी नाटकीय घटना से नहीं था, लेकिन वह मानते हैं कि इस शब्द को आसानी से गलत समझा जा सकता था और उन्हें इसके चयन पर अफसोस है।
शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, ‘‘उन सभी लोगों के लिए जो नेपाल से मेरे पहले ट्वीट में ‘ड्रामा’ शब्द के इस्तेमाल पर नाराज हैं, इस शब्द का मतलब केवल नाटकीय चीज नहीं होता। इसका एक अर्थ ऐसी स्थिति या घटनाओं की श्रृंखला भी है, जिसमें बेहद तीव्र टकराव वाली शक्तियां शामिल हों।’’
थरूर ने सफाई में क्या कहा?
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्होंने इसी अर्थ में ‘ड्रामा’ शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसे शब्द के चयन पर पछतावा है, जिसे इतनी आसानी से गलत समझा जा सकता था।
थरूर की यह सफाई एक दिन बाद आई है, जब नेपाल की अचानक आई बाढ़ पर अपनी पोस्ट में उन्होंने पहाड़ों में हुई घटना को ‘ड्रामा’ कहा था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी तीखी आलोचना हुई और कई यूजर्स ने उनके शब्दों के चयन को असंवेदनशील बताया।
शशि थरूर ने पहले बयान में क्या कहा था?
दरअसल, थरूर ने गुरुवार को एक्स पर नेपाल में आई आपदा पर चिंता जताते हुए लिखा था, 'कल काठमांडो के लिए रवाना हुआ था और मुझे बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि पहाड़ों में ऐसा ‘ड्रामा’ हो चुका है, जिससे इतनी विनाशकारी तबाही हुई।' उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा था कि उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में, जो तिब्बत सीमा के पास है, अचानक भीषण बाढ़ आई। इससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास बड़े पैमाने पर तबाही हुई।
थरूर के अनुसार, विशेषज्ञों का अनुमान है कि ग्लोबल वार्मिंग और तिब्बत में आए भूकंप के कारण ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरा हो सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा था कि काठमांडू पहुंचने के बाद उन्हें जान-माल के नुकसान की जानकारी मिली। साथ ही उन्हें बताया गया कि करीब 2,000 या उससे अधिक लोग लापता होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा था कि बाढ़ के तेज पानी ने कम से कम 19 मोटर योग्य पुलों को नष्ट कर दिया। बेतरावती-रसुवागढ़ी राजमार्ग का करीब 40 किलोमीटर हिस्सा बह गया और आठ चालू जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा।
कांग्रेस सांसद ने की भारत सरकार की तारीफ
थरूर ने नेपाल के लिए भारत सरकार की तत्काल राहत सहायता की घोषणा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि नेपाल को इस समय जितनी मदद मिल सकती है, उसकी जरूरत है। उन्होंने आपदा पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई थी। थरूर ने कहा था कि पीड़ितों में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं, जिनमें कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 100 लोग भी हैं। उन्होंने लापता लोगों के जल्द सुरक्षित बचाए जाने की प्रार्थना की थी।
हालांकि, नेपाल की तबाही और राहत सहायता को लेकर दिए गए उनके व्यापक संदेश के बावजूद सोशल मीडिया यूजर्स ने खासतौर पर ‘‘पहाड़ों में हुए ड्रामा से अनजान’’ वाले वाक्य पर आपत्ति जताई।
एक यूजर ने सवाल किया कि क्या प्रकृति का ऐसा कहर ‘ड्रामा’ है और इतने बड़े शब्दकोश ज्ञान के बावजूद ऐसी स्थिति में सही शब्दों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। एक अन्य यूजर ने थरूर को भारतीय अंग्रेजी का ‘शेक्सपियर’ बताते हुए पूछा कि क्या उनकी पोस्ट में ‘ड्रामा’ शब्द का इस्तेमाल उचित था। एक अन्य एक्स यूजर ने कहा कि इतने समृद्ध शब्द भंडार वाले व्यक्ति के लिए यह शब्दों का खराब चयन था। कुछ यूजर्स ने थरूर को उनके चर्चित शब्द ‘फैरागो’ की भी याद दिलाई, जिसका अर्थ ‘उलझा हुआ मिश्रण’ होता है।