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महाराष्ट्र: मराठी सीखने के लिए ऑटो चालकों को मिली बड़ी राहत, राउत बोले- क्या दिल्ली के दबाव में झुके फडणवीस

Fri, 28 Aug 2026 03:30 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए सरकार ने एक साल की मोहलत दी है। इससे हजारों चालकों की रोजी-रोटी पर मंडरा रहा तत्काल खतरा टल गया है। लेकिन शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह फैसला दिल्ली के दबाव में लिया। क्या भाषा के नियम में राहत के पीछे चुनावी मजबूरी है या महायुति की अंदरूनी राजनीति?

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सीएम फडणवीस के एलान पर क्या बोले संजय राउत? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखने की अनिवार्यता के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने गैर-मराठी चालकों को कामकाजी मराठी सीखने के लिए अब एक साल का समय दिया है। इससे उन चालकों को तत्काल कार्रवाई और रोजी-रोटी छिनने का डर खत्म हुआ है, लेकिन फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति को भी गरमा दिया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि फडणवीस ने यह फैसला दिल्ली के दबाव में लिया।

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संजय राउत ने आरोप लगाया कि मराठी भाषा सीखने की पहल वापस लेने या उसमें राहत देने के पीछे दिल्ली का दबाव था। उन्होंने इसे भाजपा की सहयोगी शिवसेना के लिए भी संदेश बताया। राउत ने कहा कि यह फैसला सिर्फ भाषा का मामला नहीं है, बल्कि महायुति के भीतर राजनीतिक ताकत और नेतृत्व को लेकर भी संकेत देता है। उन्होंने शिवसेना के मंत्रियों को इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की चुनौती भी दी।

चालकों को आखिर कितनी राहत मिली है?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों को कामकाजी मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत दी है। इस अवधि में भाषा की कमी के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। पहले सरकार ने अगस्त की समयसीमा तय की थी। परिवहन विभाग की ओर से मराठी की परीक्षा में असफल रहने वाले चालकों को नोटिस भी दिए गए थे। अब तत्काल कार्रवाई रुकने से बड़ी संख्या में चालकों को राहत मिली है।

क्या चालकों की रोजी-रोटी पर मंडरा रहा था खतरा?

ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने एक साल की मोहलत का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे चालकों की रोजी-रोटी पर मंडरा रहा तत्काल खतरा टल गया है। मुंबई टैक्सीमैन एसोसिएशन के नेता प्रेम सिंह के अनुसार, कई चालक 60 साल से अधिक उम्र के हैं और कम समय में नई भाषा सीखना उनके लिए मुश्किल था। वहीं, सेवा सारथी टैक्सी रिक्शा ट्रांसपोर्ट यूनियन ने बताया कि उसने चालकों को मराठी सिखाने के लिए कक्षाएं शुरू कर दी हैं।

पहले क्या नियम बनाया गया था और कार्रवाई क्यों शुरू हुई?

भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल में व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान जरूरी करने का फैसला किया था। इसके बाद चालकों के लिए मराठी कक्षाएं भी शुरू की गईं और 15 अगस्त तक भाषा सीखने की समयसीमा रखी गई। करीब एक सप्ताह पहले परिवहन विभाग ने उन चालकों को नोटिस जारी किए थे, जो सड़क पर आरटीओ अधिकारियों की ओर से लिए गए मराठी के कामकाजी ज्ञान वाले परीक्षण में सफल नहीं हुए थे। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पहले कहा था कि परीक्षा में असफल चालकों को भाषा सीखने के लिए एक महीने का समय मिलेगा और इसके बाद उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।

फडणवीस ने बताया उन्होंने क्यों लिया ये फसला?

  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए कामचलाऊ मराठी सीखना जरूरी किए जाने के फैसले की वजह बताई है। उन्होंने बताया कि ऑटो और रिक्शा चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर इस फैसले का समर्थन किया। उनका कहना था कि मुंबई में काम करने वाले लोगों को कामकाज के लिए जरूरी मराठी सीखनी चाहिए। हालांकि, संगठनों ने यह भी बताया कि इस पेशे में अलग-अलग उम्र के लोग हैं और कई लोग लंबे समय पहले पढ़ाई छोड़ चुके हैं, इसलिए कम समय में मराठी सीखना उनके लिए मुश्किल होगा।
  • फडणवीस ने बताया कि चालकों ने कामकाजी मराठी सिखाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है और इसके लिए एक साल का समय मांगा है। राज्य सरकार ने उनकी मांग स्वीकार कर ली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा और इस अवधि में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यानी सरकार ने मराठी सीखने की अनिवार्यता को खत्म नहीं किया है, बल्कि चालकों को इसे सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है।

क्या इस फैसले के पीछे चुनावी राजनीति भी है?

राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चुनावी पहलू की भी चर्चा है। इनपुट के अनुसार, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का असर भी फैसले पर हो सकता है, क्योंकि मुंबई में बसे गैर-मराठी प्रवासी चालकों का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से आता है। हालांकि राउत ने कहा कि चुनाव कारण हो सकता है, लेकिन मूल मुद्दा मराठी भाषा का ही है। इस बीच राउत ने फडणवीस के फैसले को महायुति के भीतर शक्ति संतुलन का संदेश भी बताया।

क्या एक साल की मोहलत से विवाद खत्म होगा?

फिलहाल सरकार के फैसले से चालकों को राहत मिली है, लेकिन भाषा को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा। एक सेवानिवृत्त परिवहन विभाग अधिकारी ने सवाल उठाया कि सरकार ने मराठी के ‘कामकाजी ज्ञान’ की स्पष्ट परिभाषा तय नहीं की है। इससे चालकों के आर्थिक शोषण की आशंका पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई जारी रहती तो उन्हें अगले कई महीनों तक बड़ी संख्या में मामलों से निपटना पड़ता। ऐसे में एक साल की मोहलत ने चालकों के साथ-साथ प्रशासन पर तत्काल दबाव भी कम किया है।

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