थरूर ने कहा कि ऐसे में राहुल गांधी ने इस आशय का साहसिक संकेत दिया है कि वह देश में उत्तर और दक्षिण के बीच बढ़ती खाई पाटने के लिए पुल का काम कर सकते हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि कांग्रेस प्रमुख को उत्तर और दक्षिण दोनों में चुनाव में जीत मिलने का भरोसा है।
उन्होंने कहा, ‘क्या नरेंद्र मोदी ऐसा दावा कर सकते हैं? क्या उनमें केरल या तमिलनाडु की किसी सीट से चुनाव में खड़े होने का साहस है?’
तिरुवनंतपुरम से लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने का इरादा रखने वाले थरूर ने राहुल गांधी को वायनाड में मिली शानदार प्रतिक्रिया का जिक्र किया और कहा कि यह दक्षिण में जश्न की असल भावना को दर्शाती है।
यह पूछे जाने पर कि वायनाड से खड़े होकर राहुल गांधी दक्षिण भारत के लोगों के लिए समर्थन का जो संदेश देना चाहते हैं, क्या वह सही से लोगों तक पहुंचा है, थरूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि निश्चित ही ऐसा हुआ है और इस निर्णय के कारण ही दक्षिणी राज्यों में इस बात को लेकर उत्साह साफ दिखाई दे रहा है कि अगला प्रधानमंत्री उनके क्षेत्र से निर्वाचित उम्मीदवार हो सकता है।’
यह पूछे जाने पर क्या इस कदम से दक्षिण में ‘राहुल लहर’ पैदा हो सकती है, थरूर ने कहा, ‘इसने केरल में खासकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है और निकटवर्ती कर्नाटक एवं तमिलनाडु में भी यह लहर फैल रही है।’