उन्होंने कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, तो बीजेपी नमाज पर सवाल, जिन्ना, टीपू सुल्तान, हिन्दु-मुस्लिम पर सवाल उठाना शुरू कर देती है। उन्होंने कहा कि हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाली बीजेपी न तो युवाओं को रोजगार दे पा रही है और न ही किसानों की कर्जमाफी और डेढ़ गुना एमएसपी देने का वायदा पूरा कर पा रही है और इसी के चलते देश में किसान और नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं।
उन्होंने कहा केंद्र सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। देश में हिन्दू-मुस्लिम हो रहा है, कभी गाय के नाम तो कभी जिन्ना की तस्वीर के नाम पर देश में फसाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सरकार की एक ही जान है और वह है हिन्दु-मुस्लिम, जिसके नाम पर वह हमेशा से राजनीति करती आई है। शरद यादव ने आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल लागू है और इस सरकार ने देश में दहशत का माहौल बना दिया है। इसके कारण सभी राजनीतिक दल भी चुप हैं। सरकार के मंत्री भी डरते हैं और उचित बात सार्वजनिक रूप से नहीं कर पाते हैं। संविधान ने लोगों को वोट और बोलने की आजादी दी है, लेकिन मोदी सरकार की कार्यशैली से यह खतरे में पड़ती जा रही है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से 2019 में होने वाले आम चुनावों में बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि 2019 में अगर बीजेपी को सत्ता से बाहर नहीं कर पाए तो यह संविधान को पलट कर रख देगी। उन्होंने कहा कि अगर संविधान नहीं होगा तो न बोलने की आजादी होगी और न ही वोट देने की। उन्होंने कहहा कि आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हम मिलकर लड़ेंगे और संविधान पर आंच नहीं आने देंगे, चाहे जान तक न लड़ानी पड़े। उन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, लक्ष्मीबाई, टीपू सुल्तान का जिक्र करते हुए कहा कि इन लोगों ने देश के लिए कुर्बानी दी, जिसके चलते आज हम यहां हैं।
समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि समाजवाद का मतलब है इंसानियत और हमारे पुरखों की राह समरसता थी। शरद यादव ने कहा कि हमारी लड़ाई संविधान को बचाने को लेकर शुरू हुई थी और अब हमारे लोग नई पार्टी के जरिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि लड़ते-लड़ते आजादी पाई है और लड़ते-लड़ते ही आजादी बचेगी। उन्होंने कहा कि जिनके पास हौंसला होता है, वही देश बनाते हैं।