आगामी लोकसभा चुनाव से दूर रह कर एनसीपी प्रमुख शरद पवार प्रधानमंत्री पद के लिए अंतिम सियासी दांव लगाएंगे। यही कारण है कि 77 वर्षीय पवार ने लोकसभा चुनाव लड़ने के बदले खुद को क्षेत्रीय दलों की गोलबंदी में झोंकने का फैसला किया है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा समेत कई गैरभाजपाई-गैरकांग्रेसी क्षत्रपों को इस बार क्षेत्रीय दलों के नाम पर पीएम पद की लॉटरी निकलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पवार ने बीते लोकसभा चुनाव में राजनीति में अपनी पुत्री सुप्रिया सूले को स्थापित करने केलिए परंपरागत अमरावती सीट छोड़ दी थी।
दरअसल अलग-अलग राज्यों में भाजपा के खिलाफ गैरराजग दलों के गठबंधन की बनती संभावना और कांग्रेस की कमजोर स्थिति के कारण क्षेत्रीय दलों की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। क्षेत्रीय दलों के दिग्गजों का मानना है कि अगर भाजपा बहुमत से चूकी तो पीएम पद के लिए उनके नाम की लॉटरी निकल सकती है। ऐसे में इस पद पर वही आ सकता है जिनके नाम पर ज्यादा क्षेत्रीय दलों की सहमति हो। यही कारण है कि पवार पश्चिम बंगाल की सीएम बनर्जी के साथ लोकसभा चुनाव से बहुत पहले क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हैं।
पवार के करीबी नेताओं का कहना है कि अगर भाजपा बहुमत से चूकी तो क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस का समर्थन पीएम पद हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा। पवार की कांग्रेस में भी पैठ है तो कई क्षेत्रीय दलों के प्रमुख उनके मित्रों की सूची में शामिल हैं। यही कारण है कि पवार ने लोकसभा चुनाव लडने के बदले खुद को गैरभाजपाई दलों को एकजुट करने की मुहिम में लगा दिया है। वैसे भी 77 वर्षीय पवार के पास अब अगले लोकसभा चुनाव के बाद कोई सियासी अवसर नहीं है।