बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव को लेकर शिवसेना-भाजपा के बीच शुरू घमासान के बीच अब एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को लगता है कि महाराष्ट्र की सरकार अब ज्यादा दिन की मेहमान नहीं है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के मध्यावधि चुनाव होने की भविष्यवाणी के बीच पवार ने ट्वीट किया है कि 23 तारीख (फरवरी) के बाद भी यदि ऐसी ही स्थिति रही तो एनसीपी मध्यावधि चुनाव का सामना करने के लिए तैयार है।
शरद पवार के ट्वीटर हैंडल से सोमवार की देर रात किए गए ट्वीट में कहा गया है कि ढाई साल बाद यदि महाराष्ट्र में चुनाव होता है तो कोई ज्यादा नुकसान नहीं होगा। अभी तक ऐसा माना जा रहा है कि यदि सरकार से समर्थन वापस लेती है तो एनसीपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार को बचा सकती है। परंतु, पवार ने ट्वीट कर जता दिया है कि वे भी मध्यावधि चुनाव चाहते हैं।
वहीं, राजनीतिक के जानकारों की मानें तो पवार के किसी बयान को अंतिम नहीं माना जा सकता है। संभव है कि सूबे में महानगर पालिका व जिला परिषद चुनाव के मद्देनजर पवार ने भाजपा से दूरी दिखाने के लिए ऐसा कहा हो। क्योंकि, राज्य का मुस्लिम मतदाता एनसीपी की भूमिका को लेकर आशंकित हैं।
शिवसेना की भाजपा के प्रति आक्रामक भूमिका से इस चर्चा को बल मिला है कि चुनाव बाद राज्य की भाजपानीत सरकार खतरे में पड़ सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस बार-बार दावा कर रहे है कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है।
शिवसेना हटी तो भाजपा को चाहिए सिर्फ दस विधायक
शरद पवार
भाजपा नेताओं को अभी तक ऐसा नहीं लग रहा है कि शिवसेना सरकार से अलग होगी। इसके बावजूद शिवसेना के समर्थन वापस लेने की स्थिति में सरकार बचाने के लिए भाजपा की तरफ से प्लान तैयार है। बहुमत के लिए 145 विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
भाजपा अपने 122 विधायकों सहित आसानी से 135 विधायकों का समर्थन हासिल कर सकती है। ऐसी स्थिति में उसे महज दस और विधायकों का जुगाड़ करना होगा। जो मुश्किल नहीं है क्योंकि कोई भी विधायक ढाई साल पहले पुन: चुनाव में नहीं जाना चाहता।
विधानसभा में संख्या बल
भाजपा -122, एमआईएम -02, शिवसेना -63, मनसे -01, सपा -01, कांग्रेस -42, भारतीय रिपब्लिकन पार्टी (भारिप) -01, एनसीपी -41, माकपा -01, शेतकरी (किसान) कामगार पार्टी (शेकाप) -03, राष्ट्रीय समाज पार्टी (रासपा) -01, बहुजन विकास आघाड़ी -03, निर्दलीय -07