महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बनने के बाद अजित पवार ने राज्य की राजनीति का पारा अचानक बढ़ा दिया है। पार्टी में फूट के बाद शुरू हुई लड़ाई अब एनसीपी पर अधिकार पर आ गई है। चाचा-भतीजे दोनों ने अपने-अपने दावे किए हैं। दोनों का कहना है कि उनके पास सबसे ज्यादा विधायक है। इस बीच, सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि शरद पवार इस संकट का हल तलाशने के लिए कानूनी उपाय ढूंढ़ रहे हैं। इस बीच, शरद पवार ने अजित धडे को उनकी तस्वीर का प्रयोग करने से मना कर दिया है। उन्होंने हिदायत देते हुए साफ कह दिया है कि मेरी अनुमति के बिना मेरी तस्वीर का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
शरद ले रहे कानूनी राय
रविवार को पार्टी में फूट के बाद सोमवार रात सतारा लौटे शरद पवार ने कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की है। इस दौरान उन्होंने पूछा कि इस मसले को कानूनी तरीके से कैसे सुलझाया जा सकता है। एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रिस्टो ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि कानूनी राय लेना जरूरी है क्योंकि यह मुद्दा संविधान की अनुसूची 10 से संबंधित है।
एनसीपी के प्रवक्ता के मुताबिक, अजीत पवार धड़े को 13 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त नहीं है। ऐसे में इस पर दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
पहले कानूनी सहारा लेने के शरद ने कर दिया था मना
गौरतलब है कि रविवार को अजित पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह कानूनी सहारा लेंगे तो शरद पवार ने कहा था कि वह इन सबमें नहीं पड़ेंगे बल्कि लोगों के बीच जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर राकांपा ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के समक्ष एक याचिका दायर कर रखी है। इसमें अजित पवार और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले आठ अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।
कल होगी एनसीपी के दोनों धड़ों की बड़ी बैठक
गौरतलब है कि एनसीपी के दोनों धड़ों की बड़ी बैठक कल होनी है। क्रिस्टो ने इस बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बुधवार को दोपहर एक बजे शरद पवार की बैठक में उनके समर्थन की साफ तस्वीर सामने आएगी।
अजित का क्या है दावा?
अजित पवार का दावा है कि पार्टी के 40 विधायकों और छह एमएलसी का समर्थन उनके पास है। डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने यह दावा किया था। महाराष्ट्र में एनसीपी के 54 विधायक हैं। 9 मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। अजित पवार 40 विधायकों के समर्थन की बात कर रहे हैं तो ये साफ है कि अगर दल बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू हुए तो उनके समर्थक विधायकों की सदस्यता बच जाएगी। अब यही देखने वाली बात है कि अजित पवार के साथ कितने विधायक आते हैं।
क्या है संविधान की 10वीं अनुसूची?
बता दें कि संविधान की 10वीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून के बारे में बात करती है। संविधान में यह प्रावधान पद के लालच, भौतिक लाभ या इसी तरह के विचारों से प्रेरित राजनीतिक दलबदल को रोकने के लिए किया गया है। यह दलबदल के आधार पर अयोग्यता के मुद्दे और सदन के अध्यक्ष भूमिका से भी संबंधित है।
अब यह जानिए क्या है दल-बदल विरोधी कानून
1970 के दशक में भारतीय राजनीति में आया राम गया राम की राजनीति खूब प्रचलित थी। जिसके बाद साल 1985 में 52वें संविधान संशोधन के तहत दल-बदल विरोधी कानून पारित किया गया। संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून शामिल है और संशोधन के जरिए इसे संविधान में जोड़ा गया।
दल बदल विरोधी कानून के तहत किसी जनप्रतिनिधि को अयोग्य घोषित किया जा सकता है, अगर- कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से किसी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या चुनाव के बाद कोई अन्य राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाता है या वह किसी जरूरी वोटिंग से नदारद रहता है।
अगर किसी पार्टी के दो तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो उन विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। विधानसभा का स्पीकर के पास अधिकार है कि वह दल बदल की स्थिति में विधायकों को अयोग्य ठहराने पर अंतिम फैसला करे।