सार
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने ईरान-इस्राइल संघर्ष पर भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ईरान के मामले में संतुलित रुख अपनाता रहा है, लेकिन अब सरकार का रवैया अस्पष्ट दिख रहा है। पवार ने मांग की कि सरकार को पारंपरिक सकारात्मक नीति से न भटकते हुए स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
एनसीपी एसपी के प्रमुख शरद पवार
- फोटो : पीटीआई
परमाणु कार्यक्रम को लेकर इस्राइल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष में भारत के पक्ष को लेकर गुरुवार को एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने सवाल खड़े किए हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से ईरान को लेकर भारत की मौजूदा विदेश नीति पर सफाई मांगी। महाराष्ट्र के सतारा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ईरान के मामले में संतुलित और सकारात्मक रुख अपनाता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं दिख रहा।
पवार ने कहा कि ईरान पर इस्राइल ने हमला किया है, ऐसे में भारत को ईरान से संबंध खराब नहीं करने चाहिए। उन्होंने कहा कि नेहरू, इंदिरा गांधी, नरसिंह राव, वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं ने हमेशा समझदारी और संतुलन से काम लिया। साथ ही पवार ने यह भी जोड़ा कि इस्राइल से भारत के अच्छे रिश्ते हैं, खासकर कृषि के क्षेत्र में, लेकिन किसी बड़े देश पर हमला करने से कड़वाहट पैदा होती है, जो सही नहीं।
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भारत का स्पष्ट रुख नहीं- पवार
पवार ने कहा कि वर्तमान नेतृत्व ईरान को लेकर स्पष्ट रुख नहीं ले रहा है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को भारत की पारंपरिक नीति को छोड़ने के बजाय स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। साथ ही आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (एसपी) के बीच एक बैठक 30 जून को हो सकती है, जिसमें साझा रणनीति पर चर्चा होगी।
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आपातकाल पर भी बोले पवार
इसके अलावा जब पवार से पत्रकारों ने पूछा कि भाजपा बार-बार इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का मुद्दा क्यों उठाती है,तो इसपर भी पवार ने भाजपा सरकार पर निशाना साथा। उन्होंने कहा कि आपातकाल एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसकी उस समय जनता ने प्रतिक्रिया दी थी। इंदिरा गांधी ने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। पवार ने कहा कि बार-बार इसे उठाना परिपक्वता की निशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल के बाद जनता ने उन्हें फिर से सत्ता में लाया, यह सच्चाई है।