चुनाव आयोग ने बुधवार को शरद पवार गुट के लिए पार्टी का नाम ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार’ आवंटित किया। चुनाव आयोग ने शरद पवार समूह से तीन नाम सुझाने को कहा था, जिनमें से एक को महाराष्ट्र में आगामी राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर आवंटित किया जा सके।
इस पर शरद पवार समूह ने आयोग को तीन नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदराव पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद पवार का सुझाव दिया। शरद पवार गुट ने अपने लिए चुनाव चिह्न ‘बरगद का पेड़’ भी मांगा था।
इस बीच शरद पवार के नेतृत्व वाले राकांपा गुट ने बुधवार को कहा कि वह प्रतिद्वंद्वी अजित पवार गुट को असली पार्टी के रूप में मान्यता देने और उसे ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाएगा। प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि निर्वाचन आयोग का आदेश कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जो विवाद की स्थिति में विधायक दल के बजाय एक राजनीतिक दल को महत्व देता है।
आज दोपहर तक का समय दिया गया था
दरअसल, चुनाव आयोग ने आगामी राज्यसभा चुनाव को देखते हुए शरद पवार गुट को विशेष छूट दी थी। इसके तहत शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को अपने राजनीतिक दल के लिए एक नाम का दावा करने को कहा था। इसके लिए उनके गुट को तीन प्राथमिकताएं देने को कहा था। इसके लिए बुधवार दोपहर तक का ही समय दिया गया था।
अजित गुट को माना था असली एनसीपी
इससे पहले भारतीय चुनाव आयोग ने फैसला सुनाया था कि अजित पवार गुट ही असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) है। आयोग ने एक आदेश में अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को राकांपा का चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ भी आवंटित कर दिया था। चुनाव आयोग ने कहा था कि फैसले में ऐसी याचिका की पोषणीयता के निर्धारित पहलुओं का पालन किया गया, जिसमें पार्टी संविधान के उद्देश्यों का परीक्षण, पार्टी संविधान का परीक्षण, संगठनात्मक और विधायी दोनों में बहुमत के परीक्षण शामिल थे।
140 पेज के आदेश में चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने 140 पेज के आदेश में कहा कि इस आयोग का मानना है कि अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) है और वह इसका नाम तथा चुनाव चिह्न 'घड़ी' का उपयोग करने का हकदार है। दरअसल, अजित पवार पिछले साल जुलाई में राकांपा के अधिकतर विधायकों के साथ अलग हो गए थे। उन्होंने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली भाजपा-शिवसेना सरकार का समर्थन किया था।