द्वारिका पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने हरिद्वार में अनशन करने वाले गंगा मुक्ति अभियान के योद्धा जी डी अग्रवाल स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए इसके लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
वहीं प्रखर हिंदुत्ववादी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतर्राष्टीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया ने स्वामी सानंद के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार उनकी मौत के लिए जिम्मेदारी है। जगदगुरु शंकराचार्य ने सरकार को चेतावनी दी है कि अब भी समय है वह गंगा और उसकी सहायक नदियों की धाराओं को मुक्त करके उन्हें अविरल बहने दे, नहीं तो पूरे देश के संत और पर्यावरण प्रेमी इस मुद्दे पर आंदोलन करेंगे।
स्वामी स्वरूपानंद ने आरोप लगाया कि स्वामी सानंद की मौत प्रशासन और बांध निर्माण के ठेकेदारों की मिलीभगत की साजिश का नतीजा भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। मध्य प्रदेश के नरसिंह पुर स्थित अपने आश्रम से फोन पर अमर उजाला से बात करते हुए यह मांग की।
उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद को प्रशासन इसलिए अनशन स्थल से उठाकर ले गया था ताकि उनका जीवन बचाया जा सके। लेकिन उसकी जगह स्वामी सानंद की जान चली गई। इससे साफ होता है कि सरकार और प्रशासन की नीयत साफ नहीं है। शंकराचार्य ने गंगा की मुक्ति के लिए जन समर्थन की अपील करते हुए कहा कि गंगा देश और भारतीय संस्कृति की जीवनधारा है उसे निर्मल और अविरल बहने देने के लिए सरकार और समाज को हर जरूरी कदम उठाना चाहिए।
सत्ता के मद में चूर है सरकार- तोगड़िया
एक बयान जारी करते हुए अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि आईआईटी रुड़की के प्राध्यापक रहे स्वामी सानंद गंगा पर अपना प्रकल्प प्रधानमंत्री को देना चाहते थे। इसके लिए वह 106 दिन से अनशन पर थे। उन्हें भी उसी तरह जबरन उठाया गया जैसे राम मंदिर के लिए अनशन करने वाले महंत रमहंस जी को उठाया गया थ।
तोगड़िया ने कहा कि सत्ता के मद में सरकार का अहंकार इतना बढ़ गया है कि संतों, हिंदुओं, किसानों, मजदूरों, छात्रों, मध्यम वर्गियों, व्यापारियों, मीडिया कर्मियों सभी का क्रूरता से दमन हो रहा है। प्रो. अग्रवाल की आत्म की शांति की प्रार्थना करते हुए तोगड़िया ने कहा कि मां भगवती नवरात्रि में सत्ताधारियों को सद्बुद्धि दें।