सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा सम्मेलन शांगरी-ला डायलॉग आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने खुले तौर पर ताइवान सहित अन्य देशों को धमकी दी। उन्होंने कहा कि आधिपत्यवाद और ताकत की राजनीति को एशिया-प्रशांत देशों में हावी नहीं होने देंगे। यह एशिया-प्रशांत देशों के हितों को कमजोर करता है। हम किसी भी ताकत को अपने क्षेत्र में संघर्ष और अराजकता पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे। चीन का यह बयान विरोधाभासी हैं।
ताइवान की स्वतंत्रता के खिलाफ हम दृढ़
चीनी रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम में आगे कहा कि हम ताइवान की स्वतंत्रता को रोकने के लिए दृढ़ कार्रवाई करेंगे। हम सुनिश्चित करेंगे की ऐसी कोई भी साजिश सफल न हो। ताइवान को चीन से अलग करने की जो भी हिम्मत करेगा, वह स्वयं समाप्त हो जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक चीनी अधिकारी ने कहा कि हाल ही में किए गए सैन्य अभ्यास अलगाववादियों को दंडित करने के लिए डिजाइन किए गए थे, न कि ताइवान को। उन्होंने कहा कि ताइवान की जनता पीएलए से उनकी रक्षा करने का आह्वान करते हैं, यह धारणाएं सरासर मूर्खता हैं।
चीन अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है
चीन के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका देश एक जिम्मेदार देश के रूप में उज्ज्वल भविष्य को अपनाने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करती हैं। डोंग ने कहा कि उनके राष्ट्रपति शी जिनपिंग बेहतर जीवन के लिए दुनिया भर के लोगों के लालसा का जवाब देते हैं। विशेषज्ञों ने चीन की इस बयानबाजी पर चिंता जाहिर की और आश्चर्य जताया कि चीन को ऐसी हिंसक बयानबाजी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच क्यों दिया गया।
विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति
डोंग के भाषण पर ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा कॉलेज के प्रमुख रोरी मेडकाफ ने निष्कर्ष निकाला कि यह शांगरी-ला संवाद में चीन से सुना गया सबसे लगातार डराने वाला भाषण था। चीनी प्रतिनिधियों की भावना सरासर गलत है। चीन के लिए केवल अपने हित मायने रखता है और यदि उनका हित मेल न खाए तो बाकी सब दोषी हैं। यह अंधापन खतरनाक है।