पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा, 'समिति के चैयरमैन के लिए नियम होता है कि वो बोल नहीं सकते हैं। जो सदस्य नियम के खिलाफ जाकर बोलते हैं उन पर कुछ टिप्पणी नहीं की जा सकती।' इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने सदस्यों के व्यवहार पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
दरअसल, बुधवार को सूचना एवं प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति की बैठक बुलाई गई थी। इसका भाजपा सांसदों ने बहिष्कार कर दिया। संबंधित समिति में शामिल भाजपा सांसदों ने चेयरमैन शशि थरूर पर मनमानी करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि शशि थरूर बैठक में अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं। जब तक थरूर नहीं हटाए जाते तब तक हम बैठक में नहीं जाएंगे।
इस बैठक में संसदीय समिति ने कथित पेगासस जासूसी मामले में बुधवार को आईटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारियों को संसद में पेश होने के लिए तलब किया था। वहीं, एजेंडा सिनेमैटोग्राफी (संशोधन) बिल-2021 के प्रारूप के संदर्भ में भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के कामकाज की समीक्षा करना था। समिति में शामिल बीजेपी भाजपा बैठक शुरू होने से पहले ही बाहर चले गए। उनका कहना था कि बैठक के एजेंडे के बारे में उन्हें सूचित नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि, पेगासस जासूसी कांड को लेकर विपक्ष के तेवर तीखे हैं, जिसके चलते अब तक संसद की कार्यवाही बाधित रही है। इस मामले में विपक्ष दलों के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से इस मुद्दे पर जवाब दिया गया था, लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जवाब की मांग पर अड़ा हुआ है।