शाह महमूद कुरैशी- सैयद अली शाह गिलानी
चार दिन पहले ऑल पार्टिज हुर्रियक कांफ्रेंस के अध्यक्ष मिरवाइज उमर फारूक से बात करने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को एक बार फिर से हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी को फोन किया। उन्होंने गिलानी से कश्मीर के मानवाधिकार हालातों के बारे में बात की। पाकिस्तान के विदेश मंत्री और हुर्रियत नेताओं के बीच हुई यह बात असामान्य थी।
इससे पहले नई दिल्ली में पाकिस्तान के दूत को तलब किया गया था और इस बातचीत को भारत के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करना बताया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों का कहना है कि कुरैशी और गिलानी ने जम्मू-कश्मीर के बिगड़ते हालात पर गहन चर्चा की और कश्मीर में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर बात की।
हालांकि इस बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला। भारत ने पाकिस्तान को इस तरह की कार्रवाइयों से पीछे हटाने के लिए निहितार्थ चेतावनी दी थी। कुरैशी की मंगलवार को मिरवाइज के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद बुधवार रात को यह बात विदेश सचिव विजय गोखले ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहेल महमूद से कही थी।
मिरवाइज के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने हुर्रियत नेता गिलानी को फोन किया। एनडीए सरकार ने अपने साढ़े चार सालों के कार्यकाल के दौरान उनकी बैठकों पर भी आपत्ति जताई है। यहां तक कि इस वजह से विदेश सचिवों और विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली बैठकों को भी रद्द किया गया। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार विवरण का पता चलने के बाद सरकार रविवार को जवाब देगी।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था यह पाकिस्तान द्वारा भारत की एकता को तोड़ने, हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने की कोशिश है। इस कोशिश को किसी और ने नहीं बल्कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री की गतिविधियां अपने पड़ोसी के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने के समान हैं।
कुमार ने कहा, 'विदेश सचिव ने इस बात को रेखांकित किया कि इस कार्रवाई से पाकिस्तान ने एक बार फिर से इस बात की पुष्टि की है कि वह आधिकारिक रूप से आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों को नियंत्रित और प्रोत्साहित करता है।' उन्होंने कहा कि इस तरह का कार्य दोबारा होने पर पाकिस्तान को परिणाम भुगतने होंगे।