शाह ने ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम फॉर इमरजेंसी रिस्पॉन्स’ (आईसीआर-ईआर), ‘नेशनल डाटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट लाइट 2.0’ (एनडीईएम लाइट 2.0) और ‘फ्लड हैजर्ड जोनेशन एटलस ऑफ असम’ का शुभारंभ किया। गृह मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ये तीनों प्लेटफॉर्म हमारे आपदा प्रबंधन तंत्र को नई तकनीकों और सटीकता से लैस करेंगे।
टेक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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क्या मदद करेंगे तीनों तकनीकी प्लेटफॉर्म
उन्होंने कहा कि आईसीआर-ईआर देशभर में किसी भी आपदा के समय रियल टाइम में सैटेलाइट डाटा बचाव एजेंसियों तक पहुंचाएगा, जिससे प्रतिक्रिया त्वरित होगी। एनडीईएम लाइट 2.0 देश के कोने-कोने में मौजूद हमारी आपदा प्रतिक्रिया टीमों को एकजुट होकर तेजी से काम करने की क्षमता देगा। असम के लिए जिस एटलस का शुभारंभ किया गया है, वह बाढ़ नियंत्रण एजेंसियों को बाढ़ से निपटने के काम में मदद करेगा। इसमें बाढ़ से जुड़ा रियल टाइम डाटा, उसका असर और नदियों के जलस्तर की जानकारी शामिल होगी।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने की जरूरत: शाह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से पूरी दुनिया आपदाओं का सामना कर रही है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम सबको न केवल आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना है, बल्कि उनके मूल कारणों को भी समझना और दूर करना होगा।
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मोदी सरकार में आपदा प्रबंधन का लक्ष्य 'शून्य जनहानि'
उन्होंने आगे कहा कि (नरेंद्र) मोदी सरकार के कार्यकाल में आपदा प्रबंधन के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले यह प्रणाली केवल राहत केंद्रित होती थी, लेकिन अब इसका लक्ष्य 'शून्य जनहानि' हो गया है और पूरा फोकस एक समग्र और एकीकृत नीति की ओर बढ़ा है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भविष्य की आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने, उन्नत रिसर्च करने, दुनिया भर के अनुभवों को एकत्र करके भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उन्हें अपनाने की जरूरत है।