सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर में कथित तौर पर पुलिस की गोली से मारे गए शब्बीर अहमद की लाश कब्र से निकाल कर फोरेंसिंक जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि शब्बीर की मौत पैलेट गन से हुई है। लेकिन शब्बीर के पिता का कहना है कि उनके बेटे को पुलिस ने घर पर आकर मारा है।
जस्टिस पी सी घोष और जस्टिस अमिताभ रॉय की बेंच ने शब्बीर के शव को कब्र से निकाल कर उसकी फोरेंसिक जांच के आदेश दिए। यह जांच जिला और सेशन जज की निगरानी में होगी।
पुलिस का दावा है कि शब्बीर की मौत हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद बारामूला के बाटामालू इलाके में प्रदर्शन के दौरान हुई थी।
शब्बीर के पिता अब्दुल रहमान मीर का कहना है कि उनके बेटे की मौत पुलिस की गोली से हुई। पुलिस ने उनके घर पर जाकर शब्बीर की गोली मारी।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि शब्बीर की लाश की फोरेंसिक जांच में उच्चस्तरीय पारदर्शिता बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले की तह तक जाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
जस्टिस घोष और जस्टिस रॉय ने कहा शब्बीर की लाश की जांच के दौरान श्रीनगर के जिला और सेशन जज को अपनी मदद के लिए पसंद के अफसरों को चुनने की आजादी होगी।
इससे लाश निकालने और इसकी जांच की प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी कदम कानून के मुताबिक उठाए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर होगी।
इससे पहले तीन सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। इस तरह के हालात का मानवीय दृष्टिकोण और बेहद संवेदनशीलता के साथ निपटारा करना चाहिए।