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प्रकृति का कहर: बाढ़-भूस्खलन की विभीषिका झेल रहे देश के कई राज्य, असम में 11; नगालैंड में 9 की मौत, अलर्ट जारी

Tue, 21 Jul 2026 03:31 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी/कोहिमा/श्रीनगर

सार

देश के कई राज्यों में मानसून ने फिर जोर पकड़ लिया है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 23 तक पहुंच गई। वहीं, असम में बाढ़ के चलते अब तक 11 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। नगालैंज में भूस्खलन की वजह से नौ लोगों की मौत हुई है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
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देशभर में बाढ़-भूस्खलन की आपदाएं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों समेत पहाड़ी इलाकों में प्रकृति कहर बरपा रही है। पूर्वोत्तर के राज्य असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मंगलवार को एक और व्यक्ति की मौत के साथ राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। वहीं, नगालैंड के मोन जिले में लगातार बारिश से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। चार लोग अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
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असम के 11 जिलों में आई इस विनाशकारी बाढ़ से 3.60 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि ब्रह्मपुत्र, डिकोह, देसांग और धनसिरी जैसी कई प्रमुख नदियां राज्य के विभिन्न हिस्सों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि कुछ जल निकायों ने बाढ़ का चरम स्तर भी पार कर लिया है।

असम में राहत और बचाव कार्य जारी
असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं सहित कई एजेंसियां लगी हुई हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, इस वर्ष की बाढ़ में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। बिस्वनाथ, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, कार्बी आंगलोंग, नगांव, शिवसागर और तिनसुकिया जिलों के 758 गांवों में 3,10,800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
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बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाव एजेंसियों द्वारा नावों का उपयोग करके 9,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में तैनात किया गया है, जबकि एसडीआरएफ की टीमें लखीमपुर, तिनसुकिया, धेमाजी, डिब्रूगढ़, सोनितपुर, नगांव, मोरीगांव, होजाई, कामरूप मेट्रो, कामरूप, नलबाड़ी और बारपेटा में बचाव कार्य में जुटी हैं।

असम में दूसरे दिन भी रेल सेवाएं प्रभावित
असम में बाढ़ का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। ऊपरी असम के कई हिस्सों में रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण मंगलवार को लगातार दूसरे दिन ट्रेन परिचालन प्रभावित रहा। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने कई ट्रेनों को रद्द किया है, कुछ को बीच रास्ते तक चलाया गया है और कुछ के मार्ग में बदलाव किया गया है। फंसे यात्रियों के लिए विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। वहीं, वर्तमान में 52 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 12,720 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। करीब 14,411.267 हेक्टेयर फसल क्षेत्र भी जलमग्न हो गया है।

नगालैंड में बाढ़ और भूस्खलन से नौ की मौत, चार अब भी लापता
नगालैंड के मोन जिले में लगातार बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। मंगलवार को पांच और शव बरामद किए गए। राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, चार लोग अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है। लगातार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुनियादी ढांचे, कृषि भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने कहा है कि सर्वेक्षण पूरा होने के साथ नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर में कम से कम 7,460 लोग प्रभावित हुए हैं। नगालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनएसडीएमए) की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित मोन जिला है। यहां भूस्खलन की घटनाओं में नौ लोगों की मौत हुई है। इनमें मोन टाउन के शांतम वार्ड में हुई पांच मौतें भी शामिल हैं। नागिनीमोरा में अचानक आई बाढ़ में बह गए चार लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। इनमें एक व्यक्ति को फ्रैक्चर हुआ है, जबकि तीन अन्य को मामूली चोटें आई हैं।

93 गांवों के 64 मकानों को नुकसान
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, 10 जिलों के 93 गांवों में 64 रिहायशी मकानों को नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने कहा कि सर्वेक्षण जारी रहने के कारण यह आंकड़ा बढ़ सकता है। आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है। कई जिलों में कम से कम 83 पशुओं की मौत हुई है। इनमें 15 मिथुन, 13 मवेशी और 53 सूअर शामिल हैं।

शामाटोर में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित
शामाटोर जिले में सबसे अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। यहां छह गांवों के करीब 7,000 लोग व्यापक भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं।
एनएसडीएमए की जिला-वार रिपोर्ट के अनुसार, तुएनसांग जिले के 12 गांव प्रभावित हुए हैं, जहां 201 लोग प्रभावित हैं। वहीं, जुनहेबोटो जिले के करीब 30 गांव भूस्खलन की चपेट में आए हैं और यहां 26 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर सबसे प्रभावित राज्य
सबसे अधिक प्रभावित जम्मू-कश्मीर रहा, जहां जम्मू संभाग में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक महिला और उसके दो बच्चे भी शामिल हैं। पिछले दो दिनों में राज्य में बारिश से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

अधिकारियों के अनुसार, पुंछ और राजौरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में सात लोग अब भी लापता हैं। लगातार बारिश के कारण दिन में राहत और बचाव कार्य प्रभावित रहा। हालांकि मौसम में कुछ सुधार होने पर अभियान तेज किया गया, लेकिन देर शाम तक लापता लोगों का कोई पता नहीं चल सका।
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किन राज्यों में फिर से सक्रिय हुआ मानसून?  
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय बना रहेगा। आईएमडी ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कमजोर पड़ने और उत्तर भारत में मानसूनी धाराओं के मजबूत होने के कारण मानसून फिर सक्रिय हुआ है।
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