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Crude Oil: आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों को साधने में जुटे देश के कई मंत्रालय, भारत पर कितना बढ़ रहा बोझ?

Thu, 30 Apr 2026 11:24 PM IST
शशिधर पाठक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कच्चे तेल की कीमत एक डॉलर भी बढ़ जाए तो 8-9 हजार करोड़ का बोझ आता है। अभी इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने का फैसला कर सरकार ने तेल के दाम थाम रखे हैं। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 160 रुपये के पार जा चुकी है।
 
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कच्चे तेल की कीमतों पर असर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने हाहाकार मचाकर रखा है। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय समेत अन्य देश में पेट्रोल की कीमतों को थामने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। पेट्रोलियम मामलों के जानकारों का कहना है कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में समस्याएं काफी बढ़ सकती हैं।
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भारत पर कितना बढ़ रहा है बोझ?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद डॉलर को इसका सीधा फायदा मिलता है। रुपया कमजोर होता है। भारत अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इसके कारण हमारी चिंता और बढ़ जाती है। हाइड्रोकार्बन इकानोमी के विशेषज्ञ नितिन गर्ग कहते हैं कि बाजार में कच्चे तेल की एक डॉलर की कीमत बढ़ने पर भारत पर सालाना 8000-9000 करोड़ रूपये का आयात खर्च बोझ बढ़ जाता है।

इसके कारण घरेलू ईधन पर दबाव बढ़ता है और मंहगाई दर में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि ईधन तेल का दाम बढ़ने से माल की ढुलाई, उत्पादन लागत बढ़ती है। इसका सीधा असर खाद्य और अन्य अनावश्यक वस्तुओं पर पड़ता है। व्यापार घाटा बढ़ता है। नितिन गर्ग कहते हैं कि आप देख लीजिए। ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पार पहुंचने के बाद रूपया टूटकर 95 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।  
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वित्त मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं कि दाम तो बढ़ेंगे....
वित्त मंत्रालय के अफसर कच्चे तेल का दाम बढ़ने से बढ़ रहे आर्थिक दबाव को लेकर तंग हैं। उनका कहना है कि भारत में ईधन तेल की कीमतें बढ़नी तय हैं। पेट्रोलियम और प्रकातिक गैस मंत्रालय भी ईधन तेल की कीमतों को लेकर लगातार मंत्रणा कर रहा है। ईधन तेल की कीमतों को मियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है।

भारत पेट्रोलिमय के प्रमुख सूत्र का कहना है कि 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण के जरिए तेल की कीमतों को काबू में करने की कोशिश हो रही है। परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी तेल में इथेनॉल के प्रतिशत को बढ़ाने का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। हालांकि इथेनॉल का उपयोग भढ़ाने का असर गाडि़यों के इजन और उसकी क्षमता पर पड़ रहा है।

ईरान के मुहाने पर बैठकर अमेरिका ने थाम रखी है सांसे...
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है। इसलके सामानांतर राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रपं ने ईरान के मुहाने पर पूरी तरह से समुद्री नाके बंदी कर रखी है। अमेरिका और ईरान की इस रस्साकसी की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है।
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विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि यही हाल रहे तो आने वाले समय में कच्चो तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती है। दुनिया के तमाम देश तेल की कीमतों के बढ़ने से काफी त्रस्त हैं। इसी का असर है कि दिल्ली में प्रीमियम पेट्रोल(इंडियन ऑयल के XP100)की कीमत 149 से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।

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