Meghalaya Cabinet Reshuffle: मेघालय में संगमा कैबिनेट का विस्तार हुआ है, जिसमें कुल आठ विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। इससे पहले राज्य कैबिनेट से आठ ही मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिनमें वरिष्ठ नेता एएल हेक, पॉल लिंगदोह और एंपरीन लिंगदोह शामिल थे।
मेघालय मंत्रिमंडल में फेरबदल के तहत एनपीपी के टिमोथी डी शिरा, भाजपा के सनबोर शुल्लई, यूडीपी के एम लिंगदोह समेत आठ विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। वहीं इससे पहले 12 में से आठ मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ नेता एएल हेक, पॉल लिंगदोह और एंपरीन लिंगदोह भी शामिल थे। इस कड़ी में नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाले मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन (एमडीए) सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने राजभवन में राज्यपाल सी.एच. विजयशंकर से मुलाकात की और मंत्रियों के इस्तीफे सौंपे थे।
विज्ञापन
इस मामले में एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जिन आठ मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था, उनमें एनपीपी के एंपरीन लिंगदोह, कमिंगवन यमबोन, रक्कम ए संगमा और अबू ताहेर मंडल, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के पॉल लिंगदोह और कर्मेन शायला, हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी) के शाकलियार वारजरी और भाजपा के ए.एल. हेक शामिल थे।
नियमों के मुताबिक, 60 सदस्यों वाली मेघालय विधानसभा में मुख्यमंत्री समेत कुल 12 से अधिक मंत्री नहीं हो सकते। एंपरीन लिंगदोह कृषि और कानून विभाग की मंत्री थीं, जबकि यमबोन सहकारिता और रक्कम ए संगमा शिक्षा विभाग संभाल रहे थे। अबू ताहेर मंडल ऊर्जा मंत्री थे, पॉल लिंगदोह पर्यटन, और कर्मेन शायला राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग देख रहे थे। शाकलियार वारजरी खेल मंत्रालय और एएल हेक पशुपालन विभाग के प्रभारी थे। इन मंत्रियों के इस्तीफे से नए मंत्रियों के कैबिनेट में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एनपीपी के विधायक वाइलाडमिकी शायला, सॉस्थेन्स सोहटन, ब्रेनिंग ए. संगमा और टिमोथी डी. शिरा को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, यूडीपी प्रमुख मेटबह लिंगदोह और पूर्व मंत्री लाहक्मेन रिंबुई को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। एचएसपीडीपी के विधायक मेथोडियस डखार को शाकलियार वारजरी की जगह कैबिनेट में शामिल किया जाएगा, जबकि भाजपा के सानबोर शुलाई को एएल हेक के स्थान पर मंत्री बनाया जाएगा। इस फेरबदल से सरकार में संतुलन और विभिन्न दलों के बीच प्रतिनिधित्व बेहतर करने की कोशिश की जा रही है।