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Supreme Court: नए वक्फ कानून के समर्थन में छह BJP शासित राज्य पहुंचे अदालत; सांविधानिक वैधता बनाए रखने की अपील

Wed, 16 Apr 2025 02:09 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Supreme Court: भाजपा शासित छह राज्यों ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इन राज्यों ने इस कानून की वैधता बनाए रखने की मांग की है। इस मामले में सुनवाई आज दोपहर को हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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भाजपा शासित छह राज्यों हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और असम ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट रुख किया है। इन राज्यों ने इस कानून की सांविधानिक वैधता बनाए रखने की मांग की है। 

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चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथ की तीन जजों की बेंच आज दोपहर दो बजे वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ताओं में एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं। 
 
इन छह भाजपा शासित राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। इनका कहना है कि अगर वक्फ (संशोधन) अधिनियम को रद्द किया गया या उसमें बदलाव किया गया, तो इससे प्रशासनिक और कानूनी पर कई दिक्कतें आ सकती हैं। 
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राज्यों का क्या कहना है?
मामले में मुख्य याचिका में पक्षकार बनी हरियाणा सरकार ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार ने कहा कि वक्फ संपत्तियों से जुड़ी कई समस्याएं लगातार  बनी हुई हैं, जिसमें अधूरी संपत्ति सर्वेक्षण रिपोर्ट, सही तरीके से हिसाब-किताब न होना, वक्फ अधिकरण में वर्षों से लंबित मामले और संपत्ति के रिकॉर्ड में गड़बड़ी या रिकॉर्ड न होना शामिल है। हरियाणा सरकार ने कहा कि नया संशोधित कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक प्रणाली लाने और मुतलवियों (प्रबंधकों) की निगरानी को मजबूत करने की कोशिश करता है। 

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वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की मदद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार ने कहा कि वह संसद की कार्यवाही, समिति की सिफारिशें और राष्ट्रीय स्तर पर हुई चर्चाओं से जुड़ी जानकारी कोर्ट को देगी। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने देशभर में धर्म आधारिक ट्रस्ट कानूनों की तुलना और वक्फ प्रबंधन में गड़बड़ी व पारदर्शिता की कमी को दर्शाने वाला आंकड़ा भी कोर्ट के सामने रखने की बात कही। 

मध्य प्रदेश सरकार की याचिका में कहा गया कि वक्फ कानून का मकसद वक्फ संपत्तियों के संचालन और नियंत्रण में बड़े सुधार लाना है। राज्य सरकार ने कहा कि यह कानून एक मजबूत कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार करेगा, जिससे पारदर्शिता, जबवादेही और लाभार्थियों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा। 

राजस्थान सरकार ने कहा कि पहले कई बार निजी या सरकारी जमीनों को बिना उचित प्रक्रिया के वक्फ संपत्ति के घोषित कर दिया जाता था। नए कानून में इसे सुधारते हुए यह प्रावधान किया गया है कि ऐसी किसी भी घोषणा से पहले नब्बे दिन की सार्वजनिक सूचना दो प्रमुख अखबारों में प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। राजस्थान सरकार ने कहा कि नया कानून पारदर्शिता और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करता है, क्योंकि इससे प्रभावित लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिल जाता है। 

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छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने और वक्फ बोर्ड व स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। राज्य ने यह भी बताया कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिससे संपत्तियों की पहचान, निगरानी और ऑडिटिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। इससे वित्तीय मामलों में पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।

असम की याचिका में संशोधित कानून की धारा 3ई पर फोकस किया गया है, जो अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों (जो संविधान की पांचवीं या छठी अनुसूचित के तहत आते हैं) में किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करने पर रोक लगाता है। राज्य ने बताया कि असम के 35 जिलों में से आठ जिलों को छठी अनुसूची में रखा गया है, इसलिए इस मामले के परिणाम में राज्य का सीधा हित है। 

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने मांगी पक्षकार बनने की अनुमति
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी वक्फ (संशोधन) अधिनियम का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट में ओवैसी की याचिका में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी है।
 


 

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