केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने से इस साल सरकार पर 1.14 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा है लेकिन इससे देश की राजकोषीय स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इसके लिए पहले से ही रकम का प्रावधान कर लिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उस दौरान लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए जेटली ने बताया कि पांचवे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से खजाने पर 17,000 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ा था।
छठे वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद यह वित्तीय भार बढ़ कर 40,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर सरकार पर चालू वित्त वर्ष के दौरान 1,02,100 करोड़ रुपये का भार पड़ रहा है।
चूंकि 1 जनवरी, 2016 से सिफारिशें लागू करने का फैसला हुआ है, इसलिए कर्मचारियों को एरियर का भी भुगतान करना होगा। इस वर्ष जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए एरियर करीब 12,000 करोड़ रुपये बनता है, जिसका भुगतान इसी साल किया जाएगा। इस तरह से पूरे वर्ष के दौरान सरकार पर 1,14,100 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि इतना वित्तीय बोझ बढ़ने के बावजूद राजकोषीय स्थिति पर कोई खराब असर नहीं पड़ेेेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए राशि का प्रावधान इस साल के बजट में पहले से ही किया जा चुका है।