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Kolkata: कोलकाता में सांस से जुड़े संक्रमण से सात बच्चों की मौत, डॉक्टरों ने बताई यह वजह

Thu, 02 Mar 2023 12:06 AM IST
वीरेंद्र शर्मा पीटीआई, कोलकाता

सार

बच्चों में एडेनोवायरस आमतौर पर श्वसन और आंत्र नलिका में संक्रमण का कारण बनता है। चिकित्सकों का कहना है कि दो साल तक के उम्र के बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में सांस के संक्रमण से सात बच्चों की मौत हो गई है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी। हालांकि, अधिकारी ने कहा, चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि साल के इस समय के दौरान इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां आम थीं और मृतक को दूसरी बीमारियां भी थीं।
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उन्होंने कहा, पिछले 24 घंटों में कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में पांच और बांकुरा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दो बच्चों की मौत हुई है। घबराने की कोई बात नहीं है। साल के इस समय के दौरान, इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां आम हैं। जिन लोगों में एडेनोवायरस के लक्षण थे, उनके नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए थे। लेकिन सभी मौतें एडेनोवायरस के कारण नहीं हुई थीं। 

उन्होंने कहा कि एडेनोवायरस के कारण हुई मौतों की पुष्टि करने के लिए परीक्षणों के परिणामों में कुछ समय लगेगा। राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम ने बुनियादी ढांचागत तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को डॉ बीसी रॉय पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ पीडियाट्रिक साइंसेज का दौरा किया था और घोषणा की थी कि सीसीयू और जनरल वार्ड में बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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क्या है एडेनोवायरस?
बच्चों में एडेनोवायरस आमतौर पर श्वसन और आंत्र नलिका में संक्रमण का कारण बनता है। चिकित्सकों का कहना है कि दो साल तक के उम्र के बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। दो से पांच साल की उम्र वाले बच्चों को भी संक्रमण का अधिक खतरा होता है। पांच से 10 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें कम उम्र के बच्चों की तुलना में इसका खतरा कम होता है। चिकित्सकों  ने कहा कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के इस वायरस से संक्रमित होने का कम खतरा होता है। फिर भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों का घर पर ही इलाज संभव है।
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