राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि सेवा लोगों के बीच अपनापन पैदा करती है और इसे बदले में किसी लाभ या इनाम की लालसा के बगैर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि करुणा प्रेम है, जिसकी कोई कीमत नहीं है। ऐसा नहीं है कि जानवरों में करुणा की कमी है, लेकिन करुणा का दायरा मनुष्य में व्यापक है। भागवत यहां पशु चिकित्सकों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दिखावे या इनाम के लिए सेवा नहीं करनी चाहिए। यह निस्वार्थ भाव से दिल से करनी चाहिए। भागवत ने कुष्ट रोगियों की देखभाल के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. विकास आमटे के कार्यों की सराहना की और कहा कि यदि कोई व्यक्ति दुखी होता है तो उसकी सेवा की जानी चाहिए। भागवत ने कहा, एक ही सूत्र जो सभी मनुष्य को बांधे रखता है और जिसे वो अपना मानते है उसमें भेद नहीं करता। उस गुण को मानवता कहते हैं।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. आमटे ने समाज में कुष्ट रोग की व्यापकता और बीमारी से पीड़ित लोगों को हेय दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, आज भी 1.25 करोड़ लोग इस संक्रामक बीमारी से पीड़ित हैं, जो मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय नसों, ऊपरी श्वसन पथ और आंखों प्रभावित करती है।
डॉ. आमटे ने कहा, 119 कानून हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन भेदभावपूर्ण कानूनों को खत्म करने का आदेश दिया था, लेकिन वे अभी भी मौजूद हैं। ये कानून कुष्ट रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करते हैं। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में कुष्ट रोगियों के लिए सामुदायिक पुनर्वास केंद्र आनंदवन जैसी जगहों की जरूरत बेहतर सामाजिक स्वास्थ्य का संकेत नहीं है।