फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संन्यासी बने शख्स को कोर्ट का निर्देश, 'पत्नी का खर्चा चलाने के लिए कमाओ'

Sun, 11 Sep 2016 04:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन
गुजरात हाईकोर्ट ने अपनी नौकरी छोड़ अध्यात्म की राह पकड़ने वाले एक शख्स को अपनी पत्नी के प्रति जिम्मेदारी पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उस शख्स से पैसा कमाने को कहा ताकि अपनी पत्नी की जरूरत को पूरा कर सके। 
विज्ञापन


सुनील उडासी नाम के इस शख्स का मामला जस्टिस एमजी शाह के समक्ष पहुंचा था। शाह ने कहा कि 'अगर वह लोगों की मदद करने के इच्छुक हैं, तो उन्हें कमाने के लिए भी कुछ करना चाहिए ताकि अपनी पत्नी का खर्च उठा सके।'

हाईकोर्ट ने सुनील उडासी को उनकी पत्नी अलका उर्फ सोनी के भरण पोषण की खातिर पैसा देते रहने का आदेश दिया है। इससे पहले उडासी की पत्नी अलका ने 2002 में वड़ोदरा की अदालत में केस दर्ज कर भरण पोषण की मांग की थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

'समाज के साथ पत्नी का भी ख्याल रखो'

- फोटो : अमर उजाला फाइल
केस दर्ज होने के दो साल बाद कोर्ट ने अडासी को हर महीने 3500 रुपये देने का आदेश दिया है। यह रकम उडासी की कमाई के आधार पर तय की गई। उडासी संन्यासी बनने से पहले बैंक ऑफ हैदराबाद में काम करते थे और 11000 रुपये कमाते थे। बाद में उडासी ने नौकरी छोड़ दी और विश्व जागृति मिशन के आनंदधाम आश्रम चले गए। 

2011 में उडासी ने कमाई न होने और संन्यास ले लेने के आधार पर भरण पोषण के आदेश को चुनौती दी। फैमिली कोर्ट ने एक बार फिर उडासी की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उडासी ने गुजरात हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

सुनील उडासी ने हाईकोर्ट के सामने आश्रम के हेड का एक पत्र रखा। इस पत्र में बताया गया था कि उडासी ने अब अपना जीवन धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगा दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि उडासी एक स्वस्थ इंसान हैं। उनकी सामाजिक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपनी पत्नी के भरण पोषण के लिए कमाएं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें