रविवार को दिन चढ़ने के साथ-साथ रामगढ़ के सारबा निवासी हवलदार रवि पाल उर्फ काला के घर लोगों की भीड़ जुटने लगी तो परिवार के लोगों के जेहन में अनहोनी की आशंका घर करने लगी। रवि की मां और पत्नी घर पहुंचे लोगों का मुंह ताकते, लेकिन किसी की जुबां से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। घर के भीतर महिलाएं जमा थीं और बाहर पुरुष आपस में बातें कर रहे थे। बातें करते हुए लोगों की आंखें नम हो गई थीं। घर पहुंचे लोगों का मुंह ताकते रवि की 80 वर्षीय मां माला देवी को जैसे ही पता चला कि उनका लाडला आतंकी हमले में शहीद हो गया है, वह बदहवास होकर जमीन पर बैठ गईं।
यह खबर सुनकर पत्नी के मुंह से चीख निकल पड़ी। वह सुधबुध खो बैठीं। इसके बाद तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखों से आंसू बहने लगे। रवि के दोनों बेटे वंश कुमार और काका कुमार आर्मी स्कूल पठानकोट में पढ़ते हैं। परिवार के लोगों ने रिश्तेदारों को वहां भेजकर दोनों को किसी बहाने से घर बुला लिया। शहीद रवि उड़ी में दस डोगरा रेजिमेंट में तैनात थे। उनकी रेजिमेंट का पठानकोट तबादला हो गया था। कुछ दिनों बाद उन्हें पठानकोट में रिपोर्ट करनी थी।
पूरे सारबा गांव में गम का माहौल है। ग्रामीण रवि की शहादत से दुखी हैं, लेकिन उन्हें गर्व भी है कि देश के लिए उन्होंने जान दी।
शहीद की मां बेटे की शहादत पर बदहवास हो गई है। पत्नी बार-बार बेहोश हो रही है। वह अपने पति का फोटो देखती हैं, रोती हैं और फिर बेहोश हो जाती हैं।