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Karnataka: सिद्धारमैया ने भाजपा और संघ पर लगाया आरोप, कहा- RSS प्रमुख बनने के लिए विशेष जाति का होना जरूरी

Mon, 26 Sep 2022 09:02 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

हाल ही में सीएम बासवराज बोम्मई ने कांग्रेस नेताओं के 'पेसीएम' अभियान के लिए उनकी आलोचना की थी। साथ ही कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि यह देश की सबसे पुरानी पार्टी की गंदी राजनीति है। उनके इसी बयान पर राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ने पलटवार किया है। 
 
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एक ओर राजस्थान कांग्रेस में सियासी टकराव जारी है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने भाजपा और संघ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को उन्होंने वरुणा विधानसभा क्षेत्र में सत्तारूढ़ भाजपा और संघ परिवार पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने दोनों पर 'गंदी राजनीति' करने और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर जश्न मनाने का आरोप भी लगाया। साथ ही उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी बयान दिया। 

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कर्नाटक में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने निर्वाचन क्षेत्र को लेकर कहा कि वह 2023 का विधानसभा चुनाव वहीं से लड़ेंगे, जहां के लिए पार्टी आलाकमान उनसे कहेगा। हालांकि वे वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोगों की सेवा के लिए हमेशा उपलब्ध है। इस दौरान मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई गंदी राजनीति में लिप्त है तो वह संघ परिवार और भाजपा है। कांग्रेस ने इस देश में कभी भी गंदी राजनीति नहीं की है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या देश की आजादी के लिए लड़ने वाली पार्टी गंदी राजनीति में लिप्त होगी? नाथूराम गोडसे को लेकर आरएसएस की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग गणेश जुलूस में महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के पोस्टर ले जाते हैं। क्या यह गंदी राजनीति नहीं है।

दरअसल, हाल ही में सीएम बासवराज बोम्मई ने कांग्रेस नेताओं के 'पेसीएम' अभियान के लिए उनकी आलोचना की थी। साथ ही कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि यह देश की सबसे पुरानी पार्टी की गंदी राजनीति है। उनके इसी बयान पर राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ने पलटवार किया है। 
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वरुणा में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस में केवल एक विशेष जाति के लोग ही प्रमुख बन सकते हैं। उन्होंने संघ में लोकतंत्र ना होने का भी आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने कहा कि आरएसएस प्रमुख बनने के लिए व्यक्ति को एक विशेष जाति से होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि 1925 से आज तक, 97 वर्षों में, क्या एक जाति के अलावा किसी अन्य जाति का व्यक्ति इसका प्रमुख बना है?

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