सोमवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान खत्म होने के थोड़ी देर बाद संसदीय बोर्ड की बैठक हुई। बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणा की कि एनडीए की ओर से भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी होंगे। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इस पद के लिए महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वेंकैया नायडू मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उपराष्ट्रपति चुनने के लिए 5 अगस्त को वोटिंग होगी।
जहां तक उपराष्ट्रपति के पद का सवाल है वो संसदीय तौर पर देश का दूसरा सबसे बड़ा पद है, लेकिन उपराष्ट्रपति का मुख्य काम होता है राज्य सभा को चलाना। इसके लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो राज्य सभा को अच्छी तरह से संभाल पाएं क्योंकि यहाँ अभी तक एनडीए को पूरा बहुमत नहीं है। संसदीय कार्य के दौरान सरकार के लिए जितनी समस्याएं पैदा होती हैं वो राज्य सभा से ही होती हैं। जरूरी विधेयक अटक जाते हैं, कांग्रेस और विपक्ष के एकजुट होते हैं और सरकार को कटघरे में खड़ा कर देते हैं, जिसके चलते सदन कई कई दिन तक नहीं चल पाता है। इस भूमिका में देखा जाए तो पार्टी को एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो सदन को ठीक से चला पाएं।
दूसरी खास बात ये कि जब वेंकैया नायडू संसदीय मामलों के मंत्री थे तो उनके कई सारे मित्र हैं अन्य पार्टियों में। ऐसा नहीं है कि वेंकैया नायडू केवल बीजेपी या एनडीए तक ही सीमित हैं। उनके कांग्रेस में भी मित्र हैं, समाजवादी पार्टी और जदयू में मित्र हैं। तो ये जो दोस्ती उन्होंने बनाई है वो उनके लिए फायदेमंद हो सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत में अपना विस्तार करना चाहती है और ऐसे में वेंकैया नायडू का आंध्र प्रदेश से होना उनके चयन की बड़ी वजह हो सकता है।