दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने समर्थन करते हुए उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता देने की पेशकश की है। दवे की पेशकश का आंदोलन से जुड़े नेताओं ने स्वागत किया है।
किसानों की संघर्ष समिति के सदस्यों की बैठक के बाद वरिष्ठ वकील और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने किसानों को मुफ्त में कानूनी रूप से मदद की पेशकश की है। दवे ने कहा कि 'यदि किसान किसी भी मामले को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में लड़ना चाहते हैं तो मैं उनके तरफ से मुफ्त में बहस करने के लिए तैयार हूं। मैं किसानों के साथ खड़ा हूं।'
इसके साथ ही दवे ने कृषि कानूनों को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया।
दुष्यंत दवे के इस बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एचएस फूलका ने कहा कि 'हम दुष्यंत दवे के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने किसानों की कानूनी रूप से मदद करने की पेशकश की है। सरकार को सोचना चाहिए कि जब देश के वरिष्ठ वकील कह रहे हैं कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं तो सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिए।'
किसानों और सरकार के बीच आज फिर होगी बातचीत
सरकार और किसानों के बीच मुद्दे को सुलाझाने के लिए आज यानी शनिवार को अगले दौर की बातचीत होगी। इस बातचीत में सरकारी पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर करेंगे और उनके साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल एवं वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश भी होंगे।
किसानों का 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान
उधर, आंदोलनरत किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। भारतीय किसान यूनियन के महासचिव हरिंदर सिंह लखवाल ने कहा, 'शुक्रवार की हमारी बैठक में हमने आठ दिसम्बर को ‘भारत बंद’ का आह्वान करने का फैसला किया और इस दौरान हम सभी टोल प्लाजा पर कब्जा भी कर लेंगे। यदि इन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो हमने आने वाले दिनों में दिल्ली की शेष सड़कों को अवरूद्ध करने की योजना बनाई है।'