देशभर में गणेश उत्सव की धूम है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के आवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने गणपति बप्पा का दर्शन-पूजन किया। अब इस पर सियासी बवाल जारी है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का कहना है कि पीएम के सीजेआई के आवास पर जाने से प्रोटोकॉल पर सवाल उठे हैं।
पीएम मोदी पर भारतीय राजनीति के अंतिम स्तंभ को गिराने का आरोप
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने अपने मुख्यपत्र 'सामना' के संपादकीय में पीएम मोदी पर भारतीय राजनीति के अंतिम स्तंभ को गिराने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि इसके कारण ही देश की स्थिति बिगड़ गई है। संपादकीय में आगे कहा गया, 'प्रधानमंत्री और भारत के प्रधान न्यायाधीश के बीच निजी बैठक ने प्रोटोकॉल के बारे में सवाल उठाए हैं।'
'न्यायपालिका के लिए खतरे की घंटी'
शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ न्यायपालिका के लिए खतरे की घंटी हैं। चंद्रचूड़ पर कटाक्ष करते हुए पार्टी ने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद प्रधानमंत्री उन्हें कहां स्थान देते हैं।
सीजेआई चंद्रचूड़ इस साल हो रहे सेवानिवृत्त
सुप्रीम कोर्ट की बेवसाइट के अनुसार, सीजेआई चंद्रचूड़ इस साल 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। संपादकीय में दावा किया गया कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलने में सरकार की जिन न्यायाधीशों ने मदद की उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पुरस्कृत किया गया।हालांकि, चंद्रचूड़ के बारे में एक अलग सोच है और रहेगी क्योंकि उनका परिवार न्याय देने के लिए जाना जाता है। जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब उनके पिता सीजेआई थे।
वह महाराष्ट्र के पुत्र...
संपादकीय में आगे कहा गया कि ऐसा विचार है कि चंद्रचूड़ किसी राजनीतिक प्रभाव के आगे नहीं झुकेंगे क्योंकि वह महाराष्ट्र के पुत्र हैं। सरकार को जैसे-तैसे जगाया गया, लेकिन हकीकत में ऐसे फैसले दिए गए, जिनसे सरकार को मदद मिली। यह पिछले 10 सालों में देखने को मिला।
इतना ही नहीं मुखपत्र में दावा किया गया कि ईवीएम को लेकर सबूत पेश किए गए थे कि वह समाज के लिए खतरा है, मगर इसके बावजूद इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। यह कुछ ऐसा ही था, जो सरकार चाहती थी। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट सीबीआई को नियंत्रण में रखने में भी नाकाम रहा।