भारत अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी खुद की चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने की तैयारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य रेडियो फ्रीक्वेंसी, कंप्यूट, मेमोरी, पावर मैनेजमेंट, सेंसर और नेटवर्क जैसे छह अहम सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में भारतीय तकनीक तैयार करना है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा निर्माण को मजबूती मिलेगी। सरकार अब सिर्फ असेंबली और सेवाओं तक सीमित रहने के बजाय भारत को उत्पाद बनाने वाला देश बनाना चाहती है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
भारतीय मोबाइल कंपनियों को कितना फायदा मिलेगा?
सूत्रों के अनुसार, भारतीय ब्रांड के लिए करीब 62,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना लाई जा सकती है। इसमें भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों को तीन फीसदी तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान हो सकता है। यह योजना पहले की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं से मिले अनुभव के आधार पर तैयार की जा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रोत्साहन ढांचे की पुष्टि की है और कहा है कि योजना के नियम जल्द जारी किए जाएंगे।
देश में कंपोनेंट निर्माण पर क्यों जोर?
सू्त्रों ने बताया कि सरकार का ध्यान अब पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट इकोसिस्टम को भारत में विकसित करने पर है। नई नीति के तहत धीरे-धीरे ज्यादातर जरूरी पुर्जों का निर्माण देश में ही करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पूंजीगत उपकरण, रसायन, गैस और अन्य जरूरी सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय कंपनियों के सामने क्या चुनौती है?
भारतीय कंपनियों को बेहतर गुणवत्ता और कम लागत के साथ वैश्विक बाजार में मुकाबला करने के लिए तैयार किया जाएगा। नीति में भारतीय कंपनियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि कुछ बड़ी वैश्विक कंपनियां अपनी खुद की चिप डिजाइन करती हैं, जबकि कई अन्य कंपनियां तैयार चिप का इस्तेमाल करती हैं। भारतीय कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए इसका फायदा उठाने को कहा गया है।
पुरानी योजनाओं से क्या सीखा गया?
सरकार ने कहा है कि नई योजनाएं उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं, न कि केवल सरकारी सोच के आधार पर। इसमें राष्ट्रीय लक्ष्य तय करना, डिजाइन, वितरण और प्रतिभा से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना और उसी के अनुसार प्रोत्साहन देना शामिल है। नई योजना तैयार करने में उद्योग जगत की राय को भी शामिल किया गया है।
भारतीय आईटी क्षेत्र और वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) चाहते हैं कि वे चिप डिजाइन और निर्माण के लिए अलग उत्पाद टीम या स्टार्टअप तैयार करें। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक कंपनियों के लिए आउटसोर्स डिजाइन काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्य उद्देश्य भारतीय कंपनियों को अपनी तकनीक और बौद्धिक संपदा का मालिक बनाना है।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम मामले में क्या हुआ?
सूत्रों ने बताया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ने यूजर्स नेम नीति से जुड़े मामले में सरकार को अपना जवाब दे दिया है। सरकार अब इसके कानूनी पहलुओं और संभावित कार्रवाई के प्रावधानों की जांच कर रही है। इस मामले में जल्द औपचारिक सूचना जारी होने की संभावना है।
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भारत का बड़ा लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकीतंत्र तैयार करना है, जिसमें पूंजीगत उपकरण, गहरी तकनीक वाले स्टार्टअप और अपनी बौद्धिक संपदा बनाने पर जोर होगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और खासतौर पर ड्रोन और मिसाइल जैसे रक्षा क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
अमेरिका और कई अन्य देश भारत को एक भरोसेमंद आपूर्ति साझेदार के रूप में देख रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक भारत में अनुमान आधारित चिप डिजाइन तैयार हो और उसका निर्माण भी देश में ही किया जाए। सेमीकॉन 2.0 योजना के तहत केवल उन्हीं कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिनकी चिप डिजाइन भारत में हुई हो, निर्माण भारत में हुआ हो और ब्रांड का स्वामित्व भी भारतीय हो।