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देखिए कितनी मुश्किल होती है एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग, पाक घुसपैठियों की खैर नहीं

Fri, 22 Jun 2018 09:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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काली वर्दी और बिल्ली जैसी चपलता के चलते एनएसजी कमांडोज को 'ब्लैक कैट' भी कहा जाता है। हर किसी को ब्लैक कैट कमांडो बनने का मौका नहीं मिलता है। इसके लिए आर्मी, पैरा मिलिट्री या पुलिस में होना जरूरी है। आर्मी से 3 और पैरा मिलिट्री से 5 साल के लिए जवान कमांडो ट्रेनिंग के लिए आते हैं।
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फिजिकल ट्रेनिंग: इसके लिए उम्र 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सबसे पहले फिजिकल और मेंटल टेस्ट होता है। 12 सप्ताह तक चलने वाली ये देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग होती है। शुरूआत में जवानों में 30-40 प्रतिशत फिटनेस योग्यता होती है, जो ट्रेनिंग खत्म होने तक 80-90 प्रतिशत तक हो जाती है।

जिग जैग रन- किसी भी मुश्किल को देखते ही फौरन रिएक्शन लिया जा सके, इसके लिए जिग जैग रन की ट्रेनिंग दी जाती है।

लॉग एक्सरसाइज: जिस्म के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाने के लिए ये एक्सरसाइज करवाते हैं, जिसमें हाथ सबसे खास होते हैं।
60 मीटर की स्प्रिंग दौड़- इस दौड़ के लिए सिर्फ 11 से 13 सेकेंड का वक्त दिया जाता है।
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100 मीटर की स्प्रिंग दौड़: इसके लिए 15 सेकेंड का वक्त दिया जाता है। ट्रेनिंग को और अधिक कठिन बनाने के लिए हाथों में हथियार और पीठ पर वजन भी लाद दिया जाता है।

मंकी क्रॉल: एक बंदर की तरह रस्सी के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना भी कमांडोज की ट्रेनिंग का जरूरी हिस्सा है।

इनक्लाइंड पुश अप्स: इसके बाद बारी आती है इनक्लाइंड पुश अप्स करने की।

 

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शटल रन: ये एक्सरसाइज हर हालात के लिए फिट कर देती है।

गढ्ढा फांदना: 9 फुट के गढ्ढे को फांदने से बढ़ता है कमांडोज का कॉन्फिडेंस।

दो तरह की दौड़: एक तो 25 मिनट में 5 किलोमीटर और दूसरी 9 मिनट में 2.5 किलोमीटर की दौड़ लगवाई जाती है।
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हाई बैलेंस: किसी मिशन पर जाते समय न जाने कैसी स्थिति सामने आ जाए। इससे निपटने के लिए हाई बैलेंस भी कराया जाता है।

पैरलल रोप: पैरलल रोप के जरिए कमांडोज के शरीर को और अधिक मजबूत बनाया जाता है।

स्पाइडर वेबनेट: स्पाइडर वेबनेट के जरिए ऊपर चढ़ना और फिर दूसरी ओर से नीचे उतरना हाथों की पकड़ मजबूत बनाने का काम करता है।
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रस्सी के सहारे चढ़कर 26 फुट ऊंची दीवार फांदना भी जरूरी होता है।

60 फीट ऊंची ये दीवार पर चढ़ने की ये प्रेक्टिस पहाड़ पर चढ़ने का एहसास कराती है।

आसमान से सीधे किसी कमरे में घुसना हो, तो उसके लिए कुछ इस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है।
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एक कमांडो बनने की ट्रेनिंग में अब तक तो बात हुई एक कमांडो को मजबूत बनाने की, लेकिन इसके बाद बारी आती है एक्शन की। भले ही हाथों में हथियार न हो, लेकिन एक कमांडो दुश्मन को मार गिराने की ताकत रखते हैं। इसमें कई तरह की मार्शल आर्ट की कलाएं भी सिखाई जाती हैं। दुश्मन के हाथों से चाकू छीनकर कैसे उससे उसी का गला काटना है, ये खतरनाक तरीका भी इन कमांडोज को सिखाया जाता है।
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किसी विमान के हाइजैक हो जाने की स्थिति से कैसे निपटना है इसके लिए भी एक खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। एक बनावटी विमान की मदद से ऐसी स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है।
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