एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया इस मामले में एक पक्षकार है। गिल्ड के अलावा कई अन्य व्यक्तियों और संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर इस कानून को खत्म करने और इसके दुरुपयोग को रोकने की मांग की थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राजद्रोह कानून 124A के अंतर्गत कोई नया केस रजिस्टर करने पर रोक लगा दी। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है। गिल्ड ने कहा है कि संविधान के अंतर्गत लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी दी गई है और इस कानून के जरिए नागरिकों की इस स्वतंत्रता को बाधित किया जा रहा था। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने राजद्रोह कानून पर रोक लगाकर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया इस मामले में एक पक्षकार है। गिल्ड के अलावा कई अन्य व्यक्तियों और संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर इस कानून को खत्म करने और इसके दुरुपयोग को रोकने की मांग की थी। राजद्रोह कानून 124A के अंतर्गत पहले से ही जेलों में बंद लोगों को संबंधित अदालतों में पहुंच कर जमानत लेने के लिए भी कहा गया है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सर्वोच्च न्यायालय के इस कदम की भी सराहना की है।
इस घटना के पहले देश भर के कई राज्यों में पत्रकारों पर भी राजद्रोह कानून लगाया गया था। कई घटनाओं में पत्रकारों की खबरों या केवल सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को ही राजद्रोह कानून लगाने का आधार बनाया गया था। इसमें जम्मू कश्मीर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों के पत्रकार शामिल थे। गिल्ड ने इन पत्रकारों की सम्मानजनक रिहाई के लिए भी अभियान चलाया था। लेकिन इसके बाद ही गिल्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने राजद्रोह कानून को रद्द करने के लिए जनहित याचिका लगाई जिस पर आज यह ऐतिहासिक निर्णय आया।