गुजरात में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुद्रीय सीमा के साथ कच्छ के दलदली खाड़ी क्षेत्रों में तैनात बीएसएफ जवानों के लिए बुनियादी सुरक्षा ढांचे को उन्नत किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
निगरानी उपकरणों की स्थापना की जाएगी
उन्होंने कहा कि सीमा चौकियों में हर मौसम में बिजली और पानी की आपूर्ति के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी। सरक्रीक और हरामी नाला के लगभग 100 किलोमीटर के ज्वारीय मुहाने वाले क्षेत्रों में कठोर मौसम और भौगोलिक परिस्थिति का सामना करने के लिए निगरानी (सर्विलांस) उपकरणों की स्थापना की जाएगी।
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने प्रस्ताव को दी थी मंजूरी
केंद्रीय गृमंत्रालय ने कुछ समय पहले अपने सैनिकों के लिए इस क्षेत्र की सीमा में बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए बीएसएफ के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और इस विषय को गृह सचिव अजय भल्ला ने भी उठाया था। भल्ला ने पिछले महीने बल की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की थी।
पाकिस्तान के मछुआरों की बढ़ गई संख्या
कच्छ के क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान के मछुआरों और उनकी नौकाओं की संख्या बढ़ गई है। हालांकि एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि हाल के दिनों में पाकिस्तानी नागरिकों से कुछ भी जब्त नहीं किया गया है लेकिन आतंकियों और हथियारों की घुसपैठ को रोकने के लिए क्षेत्र में चौबीसों घंटे निगरानी करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ अपने सैनिकों के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा स्थापित करना चाहता है ताकि उन्हें अपने नियमित प्रशासनिक कार्यों, गश्त और क्षेत्र की निगरानी के दौरान कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
क्रीक क्षेत्र में भारतीय मछुआरों को प्रवेश करने से रोक दिया जाता है, वहीं पाकिस्तानी मछुआरे मछली पकड़ने के लिए भारतीय सीमा में प्रवेश करते हैं। कई बार ऐसे मछुआरे बीएसएफ की गश्ती नौकाओं को देखते ही अपनी नावों को छोड़कर पाकिस्तान की ओर भाग जाते हैं।
10 जुलाई को पकड़े गए थे चार पाकिस्तानी मछुआरे
जुलाई में, बीएसएफ ने पड़ोसी देश के चार मछुआरों को पकड़ा और 10 जुलाई को जब्त किया। इससे पहले जून में नौ पाकिस्तानी नौकाओं के साथ तीन और पाकिस्तानी मछुआरे पकड़े गए थे।
मई में बीएसएफ ने बुझ के हरामी नाला के पास पाकिस्तान की मछली पकड़ने वाली नौ नौकाओं को जब्त किया था और तीन मछुआरों को पकड़ा था।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने 16 जुलाई को बीएसएफ के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए बल को हरामी नाला और क्रीक क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सीमा ढांचे को विकसित करने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया था।