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नक्सल क्षेत्र का एक चुनावी बूथ संभालेंगे 80 जवान, मतदान के बाद वोटरों की होगी खुफिया सुरक्षा

Thu, 18 Oct 2018 06:58 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में नक्सली, मतदान बूथों पर हमला न कर सकें, इसके लिए एक बूथ पर कम से कम 80 जवान तैनात रहेंगे। साथ ही मतदान के बाद लोगों को अपने घर तक पहुंचने में असुरक्षा महसूस न हो, इसके लिए उन्हें खुफिया सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।

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इसका मतलब है कि सुरक्षा बल किसी को दिखे भले ही नहीं, मगर वे उनके आसपास ही मौजूद रहेंगे। नक्सलियों के कुछ समूहों द्वारा मतदान का बहिष्कार करने की धमकी के चलते यह कदम उठाया गया है। दूसरी ओर कई बड़े नक्सली ग्रुप वोटिंग से दो-तीन दिन पहले गांवों में यह सूचना फैला देते हैं कि किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट देना है। 

सुरक्षा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस खेल के पीछे केवल रुपया-पैसा होता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। सीआरपीएफ के आईजी संजय अरोड़ा, जो कि छत्तीसगढ़ के नक्सल क्षेत्र में तैनात हैं, का कहना है कि चुनाव में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम मोल नहीं लिया जा सकता। बूथ छोटा हो या बड़ा हो, हमें वहां की अभेद सुरक्षा करनी है। जहां नक्सली हमले का खतरा ज्यादा है, वहां एक बूथ पर 70-80 जवान तैनात किए जाएंगे।
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अगर शांतिपूर्वक बूथ है तो इससे आधे में भी काम चल सकता है। सुकमा और दंतेवाडा, इन जगहों पर नक्सली बंदूकों से ही हमला करते हैं, जबकि बीजापुर जैसे इलाके में वे आईईडी विस्फोट कर देते हैं। सीआरपीएफ, दूसरे अर्धसैनिक बल और लोकल पुलिस के साथ मिलकर नक्सली जिलों के छह-सात रोड, जो कि सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं, वहां नियमित पेट्रोलिंग कर रहे हैं। जिन सड़कों या पैदल रास्तों से सुरक्षा बल चुनाव बूथ तक पहुंचेंगे, उनकी भी नियमित रिपोर्ट ली जाती है। 

सीआरपीएफ एवं दूसरे अर्धसैनिक बल जो लंबे समय से नक्सली क्षेत्र में तैनात हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वे हर तरह के जोखिम से निपटने में सक्षम हैं। चिंता केवल उनकी रहती है जो दूसरे राज्यों से और पहली बार नक्सल इलाके में चुनावी ड्यूटी पर आ रहे हैं। उन्हें वोटिंग सेंटर तक सुरक्षित पहुंचाना, यह भी किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए सीआरपीएफ ने पूरी तैयारी कर ली है। 

चूंकि यहां के सुरक्षा मामले में सीआरपीएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है, इसलिए वे दूसरे अर्धसैनिक बलों को यहां तक पहुंचाने और ड्यूटी के बार उन्हें सुरक्षित तरीके से एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन तक छोड़ने की जिम्मेदारी बखूबी निभाते हैं। इसमें सीआरपीएफ की कोबरा इकाई के कमांडो का सहयोग लिया जाता है।

सुरक्षाबलों का जब कोई भी मूवमेंट होगा तो उससे पहले तमाम रास्ते पर यूएवी जंगल का हाल बताएंगे। चुनाव के दिन सुबह से लेकर शाम तक हर एक बूथ के पचास मीटर के दायरे में यूएवी उडते रहेंगे। अति संवेदनशील बूथ पर कम से कम छह-सात यूएवी रहेंगे।

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