पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा बल अपनी तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ‘मेड इन इंडिया’ कारबाइन की खरीद कर सकते हैं।
यह विचार कारबाइन के आयात प्रस्ताव को सफल न होते देख किया जा रहा है। कारबाइन सेना का अहम हथियार है। इसका इस्तेमाल करीबी मुकाबले में किया जाता है। सेना काफी समय से कारबाइन सौदे पर मंथन कर रही है।
एक सरकारी सूत्र ने बताया कि पश्चिम बंगाल के इशापोर स्थित आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड की ओर से निर्मित कारबाइन का प्रस्ताव सुरक्षा बलों को भेजा गया है। सुरक्षा बल इनकी खरीद पर विचार कर रहे हैं। तीनों सशस्त्र सेनाओं के लिए हथियार खरीद में शामिल अधिकारियों ने इनका प्रारंभिक परीक्षण भी किया है।
देश में बनी कारबाइन की खरीद का विचार इस तथ्य के सामने आने के बाद बनाया गया कि सुरक्षा बल दूसरे देशों से कार्बान की खरीद नहीं करेंगे क्योंकि कुछ चुनिंदा देश ही इनका निर्यात करते हैं और वह भी बेहद सीमित मात्रा में।
साथ ही विदेश से कारबाइन की खरीद का मुद्दा पिछले दो साल से अटका हुआ है क्योंकि यह मामला राजग-एक की सरकार के तहत रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा इस पर फैसला लेने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति को भेजा गया था।
सुरक्षा बलों को कुछ 3.50 लाख कारबाइन की आवश्यकता है लेकिन वे 94,000 कारबाइन जल्द आयात करना चाहते थे। यदि ‘मेड इन इंडिया’ कारबाइन को चुना जाता है तो आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड कारबाइन को कठिन परीक्षण से गुजरना होगा और शुरुआत में इनकी सीमित मात्रा में खरीद की जाएगी।
सीक्यूबी कारबाइन हासिल करने की कोशिश 2008 के बाद से सफल नहीं हुई है। कारबाइन खरीद की पहली खेप को चीन के मोर्चे पर तैनात जवानों को दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सिग साउर राइफलों की दूसरी खेप की खरीद को मंजूरी दे दी है। इन्हें भी चीन सीमा पर तैनात जवानों को मुहैया कराया जाएगा।