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गणतंत्र दिवस के अवसर पर कहां चूक हो गई? धरे रह गए सुरक्षा बंदोबस्त और सरकार के दावे

Tue, 26 Jan 2021 04:25 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किसानों ने अहिंसक, शांतिपूर्ण, मर्यादित तरीके से परेड निकालने की अनुमति मांगी थी और इसके लिए दो महीने से सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बार्ड पर अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हवाला दे रहे थे। दिल्ली पुलिस ने 37 शर्तों के साथ किसान नेताओं को शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति दी थी...
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protestors puts flags atop a dome at Red Fort - फोटो : ANI
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विस्तार
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किसान प्रदर्शनकारियों ने गणतंत्र दिवस के दिन लाल किला की एतिहासिक प्राचीर से झंडा फहराया। यह घटना देश की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़ी कर रही है। लाल किला की प्राचीर से किसान प्रदर्शनकारियों ने न केवल निशान साहिब का झंडा फहराया, बल्कि तिरंगा लहराए जाने वाले खंबे से किसान संगठन का भी झंडा लहराया। प्रदर्शनकारियों की इस करतूत की न तो कोई किसान संगठन जिम्मेदारी ले रहा है और न ही कोई किसान नेता इस पर कुछ बोलने के लिए तैयार हैं। अभी सरकार की तरफ से भी कोई इस चूक पर कुछ नहीं बोल रहा है।

सरकार की व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल

किसान नेताओं ने 'जय जवान, जय किसान' की तर्ज पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति मांगी थी। किसानों ने अहिंसक, शांतिपूर्ण, मर्यादित तरीके से परेड निकालने की अनुमति मांगी थी और इसके लिए दो महीने से सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बार्ड पर अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हवाला दे रहे थे। दिल्ली पुलिस ने 37 शर्तों के साथ किसान नेताओं को शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड निकालने की अनुमति दी थी।

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हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा तीनों राज्य की पुलिस ने नाकों चने चबवाकर उन्हें यह अनुमति दी थी। लेकिन सिंघु बॉर्डर पर सबसे पहले किसान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर ट्रैक्टर परेड की शुरुआत की। इसके कुछ समय बाद ही टिकरी बॉर्डर में भी इसे दोहराया और इसके बाद गाजीपुर बॉर्डर से भी किसानों के ट्रैक्टर जत्थे ने अक्षरधाम की तरफ रुख कर लिया। अक्षरधाम पर करीब दो किमी लंबे ट्रैक्टर के काफिले को सुरक्षा बलों ने रोका भी और कुछ समय बाद इन्हें आगे की तरफ जाने दिया गया।

लेकिन सबसे बड़े सवाल है कि आखिर देश की सुरक्षा व्यवस्था से इतना बड़ा खिलवाड़ कैसे हुआ? इसमें चूक कहां हुई?

सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से कहां हुई चूक

किसान आंदोलन, किसानों से बातचीत और किसानों से निपटने के मामले में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार केंद्रीय मंत्रियों, अधिकारियों, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस के संपर्क में हैं। कुछ दिन पहले गृहमंत्री दिल्ली पुलिस मुख्यालय भी गए थे। समझा जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी किसान आंदोलन, सुरक्षा बंदोबस्त समेत अन्य पहलुओं का जायजा लिया था। खुफिया एजेंसियों ने भी केन्द्र सरकार को इसे लेकर इनपुट दिए थे। दिल्ली पुलिस को भी किसानों और किसानों के प्रदर्शन को हाईजैक करने अथवा इसका दुरुपयोग करने में लगे लोगों की मंशा का पूरा अंदाजा था।

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही किसानों के इस आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे से जोड़ चुके हैं। यह सरकार और सुरक्षा बलों को पता है कि सिंघु, टीकरी, और गाजीपुर सीमा पर लाखों की संख्या में किसान उपस्थित हैं। ऐसे में इतनी भीड़ बेकाबू हो सकती है। यह डर केवल दिल्ली पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं था, यह आशंका दिल्ली के आम लोगों को भी थी। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि केन्द्र सरकार, उसके सुरक्षा कर्मी और व्यवस्था से जुड़े लोग कहां चूक गए।

वहीं बेकाबू हुई स्थिति के लिए किसान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को ही जिम्मेदार ठहराया। आईटीओ के पास प्रदर्शनकारी किसान गुरजिंदर ने बताया कि वे सब शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। शांति तो दिल्ली पुलिस ने भंग की। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठियां भांजी। होशियारपुर के राजिंदर सिंह का कहना है कि किसानों पर पुलिस ने जुल्म ढाया। मोंगा से आए वरुण धवन का कहना है कि ट्रैक्टर पर शांतिपूर्ण परेड निकल रही थी, अचनाक पुलिस ने ही रास्ता रोक लिया। इसके बाद गड़बड़ शुरू हो गई।

किसानों के प्रदर्शन में क्यों लहराए गए हथियार?

किसानों की ट्रैक्टर परेड में बड़ी संख्या में लोग हथियारों के साथ थे। कुछ सिखों के हाथ में तलवार, बरछा, भाला, फरसा जैसे हथियार थे। किसान नेताओं का कहना है कि सिंघु बॉर्डर पर ऐसे तमाम निहंग योद्धा किसान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा में हैं। लुधियाना से आए रंजीत छाबड़ा ने कहा कि ये पिछले दो महीने से डटे हैं और निहंग किसी को कोई तकलीफ नहीं पहुंचाते। बताते हैं इन्ही में से कुछ निहंग घोड़े पर भी सवार थे। इन्होंने ही सिंघु बॉर्डर पर सबसे पहले पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया था।

किसान भूल गए थे रास्ता, पुलिस ने शांति से काम नहीं लिया

एक किसान नेता का कहना है कि पु्लिस ने ही गड़बड़ी की। उनका कहना है कि हजारों की संख्या में ट्रैक्टर निकले थे। इसमें से आगे के कुछ ट्रैक्टर रास्ता भटक गए। उनके पीछे बाकी ट्रैक्टरों का रेला निकल पड़ा, लेकिन पुलिस उन्हें समझाकर-बुझाकर सही रास्ता दिखाने की बजाय उनसे उलझ गई। वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला को बताया कि किसान आंदोलन में कुछ राजनीतिक दलों ने प्रवेश करके इसे दिशाहीन बनाया। राकेश टिकैत का कहना है कि उनके साथ आए किसान और उनके ट्रैक्टर अपने तय कार्यक्रम के हिसाब से रूट पर ही ट्रैक्टर परेड के लिए तैयार हैं।  

भारतीय किसान यूनियन (असली, अराजनैतिक) के प्रमुख चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि कुछ किसानों को अक्षरधाम के पास पुलिस ने रोका था। बाद में यह काफिला आगे बढ़ गया। चौधरी ने कहा कि उन्हें नहीं पता लाल किला पर पहुंचने वाले किसान कहां से और कौन हैं। वह केवल इतना जानते हैं कि कुछ किसान ट्रैक्टर रास्ता भटक गए थे। वह वापस लौट रहे हैं और हमारा काफिला आईटीओ से अब डासना होते हुए गाजीपुर बॉर्डर की तरफ बढ़ रहा है।

किसान नेता योगेन्द्र यादव ने भी कहा कि उनके साथ और उनके संगठन के लोग संयमित हैं। लाल किला पहुंचने वाले और सिंघु बॉर्डर के किसान उनके संगठन के लोग नहीं हैं।

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