संजय राउत ने कहा कि हम ‘ठाकरे’ को मराठी में बना रहे थे। फिर लगा बाला साहब पूरे देश में लोकप्रिय थे तो हिंदी में भी बनाया। दोनों भाषाओं की फिल्मों में थोड़ा फर्क होगा। हिंदी में हमने राष्ट्रीय और वैश्विक परिदृश्य का खयाल रखा। मराठी संस्करण में हमने उन मुद्दों को उभारा जिनका संबंध महाराष्ट्र या मुंबई से है।
बाला साहेब के राजनीतिक करिअर की शुरुआत मराठी अस्मिता के लिए संघर्ष से हुई थी। हमने उनके 1961 से आगे के 20-25 साल दिखाए हैं, जब उन्होंने शिवसेना को संगठित किया। राउत ने आगे कहा कि हम ‘ठाकरे’ के बाद पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की बायोपिक बनाएंगे।