भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के बीच बंगाल की खाड़ी में हो रहे मालाबार युद्धाभ्यास के दूसरे चरण के दौरान नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और अमेरिकी नौसेना के नौसेना प्रमुख एडमिरल माइकल गिल्डे अमेरिका के परमाणु हथियारों से लैस युद्धपोत यूएसएस कार्ल विंसन पर सवार हो गए। अब भारतीय सैनिक इसी युद्धपोत पर युद्धाभ्यास कर रहे हैं।
इस मौके पर नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि जहां तक मालाबार अभ्यास का संबंध है, यह दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। इस अभ्यास में चार नौसेनाएं भाग ले रही हैं। समय के साथ, हमने विश्वास और समझ का निर्माण किया है।
अमेरिकी नौसेना के नौसेना प्रमुख एडमिरल एम गिल्डे ने कहा कि हम भारतीय नौसेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा इरादा आने वाले हफ्तों, महीनों और वर्षों में उनके साथ और अधिक निकटता से काम करने का है। हमें लगता है कि हम स्वाभाविक भागीदार हैं। मालाबार अभ्यास बहुत सफल रहा है।
भारतीय नौसेना के अग्रिम मोर्चे के युद्धपोत शामिल
भारतीय नौसेना इस अभ्यास में अपने अग्रिम मोर्चे के युद्धपोत आईएनएस रणविजय, रणविजय सतपुड़ा, एक पनडुब्बी और लंबी रेंज के समुद्री निगरानी एयरक्राफ्ट पी8आई का एक बेड़ा हिस्सा ले रहा है।
यूएसएस कार्ल विंसन के अलावा अमेरिकी नौसेना का यूएसएस लेक चैंप्लेन और गाइडेड मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्टॉकडेल भी इसमें शामिल है। साथ जापान की ओर से युद्धपोत जेएस कागा व जेएस मुरासेम तो ऑस्ट्रेलिया से एलएमएएस बलाराट और सीरियस शामिल हैं।
कार्ल विंसन ने अपनी पहली यात्रा साल 1983 में की थी। इसके बाद यह ऑपरेशन डेजर्ट स्ट्राइक, ऑपरेशन इराकी फ्रीडम, ऑपरेशन साउथर्न वॉच और ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम सहित कई प्रमुख अभियानों का हिस्सा रहा।
अमेरिकी सील से कम नहीं मार्कोस
मार्कोस (MARCOS) को मरीन कमांडो फोर्स भी कहा जाता है। यह भारतीय नौसेना की विशेष फोर्स टीम है। 1980 के दशक से लेकर अभी तक मार्कोस ने सीक्रेट मिशन को अंजाम दिया है। मार्कोस अपने ऑपरेशन को इतनी तेजी और तत्परता से अंजाम देते हैं कि इन्हें किसी मायनों में अमेरिकी सील से कम नहीं आंका जा सकता है। भारतीय नौसेना की एलीट स्पेशल फोर्स आतंकी हमले के मुकाबले से लेकर पानी के भीतर ऑपरेशन, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन समेत हर चीज में माहिर है। मार्कोस कमांडोज टीएआर-21 असॉल्ट राइफल समेत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हथियार से लैस होते हैं।