काकरापार में भारत के दूसरे स्वदेशी परमाणु ऊर्जा रिएक्टर ने पहला चुनौतीपूर्ण पड़ाव को पार कर लिया है। परमाणु रिएक्टर में ईंधन के विखंडन की चेन रिएक्शन स्वत: बनाए रखने में सफलता मिली है। आसान भाषा में कहें तो परमाणु ऊर्जा संयंत्र सामान्य ढंग से काम करने और बिजली बनाने के लिए तैयार है। हालांकि, अभी कुछ और परीक्षण किए जाएंगे। यहां से 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
काकरापार परमाणु ऊर्जा परियोजना (काप) की यूनिट 4 भारत में घरेलू क्षमता से बन कुल 16 प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर्स (पीएचडब्ल्यूआर) में से दूसरा रिएक्टर है। हर रिएक्टर से 700 मेगावाट बिजली मिलेगी। संयंत्र में रात 01:17 बजे हासिल हुई इस उपलब्धि के समय न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. (एनपीसीआईएल) के अध्यक्ष व एमडी बीसी पाठक मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यूनिट 3 से व्यवसायिक उत्पादन शुरू होने के महज 6 महीने बाद ही मिली यह सफलता महत्वपूर्ण है। क्रांतिकता के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) के सभी औपचारिक समझौतों का पालन किया गया है। संयंत्र को कड़ी जांच के बाद ही अनुमति दी गई थी। काप-3 और 4 यूनिट्स गुजरात के सूरत में हैं।
एनपीसीआईएल ने देश भर में सोलह 700 मेगावाट पीएचडब्ल्यूआर बनाने की योजना बनाई है और इसके लिए वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। राजस्थान के रावतभाटा (आरएपीएस 7 और 8) और हरियाणा के गोरखपुर (जीएचएवीपी 1 और 2) में 700 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण चल रहा है।