बैठक में इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभावित जिलों का विश्लेषण और कुछ अहम सांख्यिकीय आंकड़े पेश किए गए। इनके मुताबिक कोविड-19 से होने वाली मौत के मामलों में लगभग 90 प्रतिशत मामले 45 साल ये ज्यादा आयुवर्ग वालों के हैं।
44 फीसदी ही लोग ही लगा रहे मास्क
अध्ययन के नतीजों में रेखांकित किया गया कि 90 प्रतिशत लोगों को जहां इस बीमारी के बारे में जानकारी है, वहीं मास्क वास्तव में सिर्फ 44 प्रतिशत लोग ही लगाते हैं। यदि एक संक्रमित व्यक्ति की रोकटोक नहीं हो तो वह 30 दिनों की अवधि में 406 और लोगों को संक्रमित कर सकता है जबकि भौतिक संपर्क को अगर घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाए तो यह आंकड़ा घटकर 15 लोगों का हो जाएगा जबकि भौतिक संपर्क में अगर 75 प्रतिशत तक कमी कर दी जाए तो पीड़ित के संपर्क में आने पर संक्रमित होने वालों की संख्या 2.5 (औसतन) रह जाएगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि ‘दूसरी लहर’ को देखते हुए कोविड-19 को लेकर जमीनी स्तर पर विषाणु की रोकथाम व प्रबंधन रणनीति को लेकर लोगों की लापरवाही से ज्यादा नजर आ रही है। केंद्र ने राज्यों से कहा कि ऐसे में 46जिलों में कम से कम 14 दिनों तक पाबंदियों का कड़ाई से पालन और संपर्क में आए लोगों की तलाश की सिफारिश की जाती है। ताकि संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला टूटे और पिछले साल सामूहिक प्रयास से हासिल किए गए प्रयासों को बर्बाद होने से रोका जा सके।
केंद्र ने कोविड-19 की प्रभावी रोकथाम व प्रबंधन के संदर्भ में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पांच स्तरीय रणनीति बनाई है।
- राज्य व केंद्र शासित प्रदेश कोविड-19 जांच में व्यापक इजाफा करें।
- 70 प्रतिशत जांच आरटीपीसीआर से करने की कोशिश की जाए।
- क्वारंटीन व आइसोलेशन का प्रभावी पालन हो।
- शुरुआती 72 घंटों में पीड़ित के संपर्क में आए औसतन 30 करीबी लोगों की पहचान हो।
- जांच कर इन लोगों को क्वारंटीन किया जाए।