Seaplane Mission : गहरे सागर में छिपे असंख्य रहस्यों को तलाशने के लिए 2026 में हमारे वैज्ञानिक 6,000 मीटर गहरे सागर में उतरेंगे। 2021 में शुरू हुआ देश का पहला समुद्रयान मिशन 4,077 करोड़ रुपये की लागत से 2026 की पहली तिमाही तक बनकर तैयार हो जाएगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत विकसित होने वाले इस मिशन के लिए सरकार ने 2021 से 2024 तक पहले चरण के लिए 2,823 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
समुद्रयान मिशन का उद्देश्य तीन इंसानों को समुद्र में 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए एक स्व-चालित मानवयुक्त पनडुब्बी विकसित करना है। इसके लिए पनडुब्बी ‘मत्स्य 6000’ का डिजाइन बनकर तैयार हो गया है। इसमें गहरे समुद्र की खोज के लिए वैज्ञानिक सेंसर और उपकरणों का एक विशेष सूट भी होगा।
यह पनडुब्बी 12 घंटे तक काम करेगी और आपात स्थिति में इसका संचालन 96 घंटे तक हो सकता है। इस मिशन की अनुमानित समय सीमा 2020-2021 से 2025-2026 तक पांच वर्ष है। अक्तूबर 2021 में इस मिशन की शुरुआत के साथ ही भारत अमेरिका, फ्रांस, रूस, जापान और चीन जैसे उन्नत प्रौद्योगिकी वाले देशों की फेहरिस्त में शामिल हो गया था।
चेन्नई में तैयार हो रहे विशेष उपकरण
चेन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) ने इस मिशन के लिए 6000 मीटर गहराई में काम करने वाले रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) विकसित किए हैं। इनके अलावा पानी के भीतर काम करने वाले कई यंत्र जैसे ऑटोनॉमस कोरिंग सिस्टम (एसीएस), ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (एयूवी) और डीप सी माइनिंग सिस्टम विकसित किए हैं।